अमृतसर रेल हादसा: कमिश्नर बोले, मैदान की परमिशन दी थी रेलवे ट्रैक पर खड़े होने की नहीं
नई दिल्ली। अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास दशहरे के दिन हुए हादसे में लगभग 61 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में प्रशासन और राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पंजाब सरकार ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं अमृतसर के पुलिस कमिश्नर एसएस श्रीवास्तव का कहना है कि 20 जगहों पर कार्यक्रम की इजाजत दी गई थी। पुलिस ने यह इजाजत शर्त के साथ दी थी, इसमें धोबी घाट इलाके की परमीशन भी थी।

श्रीवास्तव ने कहा, 'हमने एक निश्चित इलाके के लिए अनुमति दी थी, अब जाहिर तौर पर यह परमीशन ट्रैक पर जाने के लिए तो नहीं थी। खामियों की जांच की जा रही है। मामले में चूक की जांच की जा रही है। उधर इस मामले में उस ट्रेन के ड्राइवर का लिखित बयान सामने आया है। अरविंद ने उस दिन ट्रेन का चार्ज लेने से लेकर हादसे के बाद का पूरा घटनाक्रम बताया। उन्होंने यह भी बताया कि हादसे के बाद उनकी ट्रेन रूकने की स्थिति में आ गई थी, लेकिन अचानक लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। ऐसे में ट्रेन में लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्राइवर ने वहां ट्रेन नहीं रोकी।
इस बीच हादसे में घायल हुए लोगों के मिलने वालों से सिलसिला जारी है। पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू दूसरे दिन भी घायलों का हालचाल लेने सिविल अस्पताल पहुंचे। इसके अलावा पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिन्द्रा घायल लोगों से मिलने के लिए अमृतसर सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मामले की जांच के आदेश दे दिए है। दोषिय़ों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि अमृतसर में शुक्रवार को दशहरा मेले के दौरान हुए ट्रेन हादसे में 61 लोग मारे गए हैं और 72 लोग घायल हुए हैं। हादसा शहर के जोड़ा फाटक इलाके में हुआ, जहां लोग रावणदहन देखने के लिए इकट्ठा हुए थे। पटाखे तेज आवाज के साथ इधर-उधर फूटने लगे तो लोगों में भगदड़ मच गई और वे ट्रैक की तरफ भागे। उसी वक्त वहीं से तेज रफ्तार से एक ट्रेन गुजरी जिसकी चपेट में 100 से अधिक लोग आ गए।












Click it and Unblock the Notifications