पंजाब सीएम अमरिंदर सिंह का दिल्ली में धरना, बोले- हमारे साथ सौतेला बर्ताव क्यों
नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह राज्य के विधायकों और मंत्रियों के साथ आज (बुधवार) दिल्ली में जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब के विधायक मार्च करते हुए पंजाब भवन से जंतर मंतर पहुंचे हैं। पार्टी के विधायक दिल्ली के पंजाब भवन से चार बैचों में धरना स्थल पर पहुंचे। वहीं सीएम अमरिंदर सिंह राजघाट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद धरने का नेतृत्व करने जंतर मंतर पहुंचे हैं। पंजाब सीएम और विधायकों का कहना है कि किसानों के आंदोलन के कारण मालगाड़ियों की आवाजाही की अनुमति केंद्र नहीं देने से आवश्यक आपूर्ति की स्थिति और बिजली संकट को लेकर अपनी आवाज मोदी सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
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धरनास्थल पर अमरिंदर सिंह ने कहा कि हम राष्ट्रीय ग्रिड से उन फंडों से बिजली खरीद रहे हैं, जो हमारे पास बचे हैं। जीएसटी का जो हिस्सा राज्यों को मिलना संवैधानिक गारंटी है, वो नहीं मिला है। ये मार्च से लंबित है। 10,000 करोड़ केंद्र को हमें देने हैं लेकिन नहीं दिए जा रहे। यह सौतेला व्यवहार गलत है ।
पंजाब सीएम ने कहा कि यह कोई 'मोर्चा-बंदी' नहीं है। हमने पंजाब में स्थिति के बारे में बताने के लिए राष्ट्रपति से समय मांगा लेकिन उन्होंने समय नहीं दिया। इसलिए हमने सोचा कि हम इस मामले को यहां उठाएं। उन्होंने कहा कि मैंने पीएम से समय नहीं मांगा है लेकिन मैं उनसे भी मिलने की कोशिश करूंगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को कहा था कि वह राज्य में बिजली संकट और जरूरी सामग्री की आपूर्ति के मुद्दे को रेखांकित करने के लिए बुधवार सुबह राजघाट में कांग्रेस विधायकों के साथ धरना देंगे। दिल्ली में विभिन्न सुरक्षा प्रतिबंधों के मद्देनजर दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर बाद में कैप्टन सिंह ने धरने को जंतर मंतर में स्थानांतरित कर दिया।
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का कहना है कि राज्य में बिजली संकट और जरूरी सामग्री की आपूर्ति के मुद्दे को रेखांकित करने के लिए वह ये प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में कोयला, यूरिया, डीएपी और अन्य जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति रेलवे के निर्णय की वजह से रूकी हुई है। सिंह ने कहा कि किसानों की ओर से प्रदर्शन के तहत आवाजाही बाधित करने में ढील देने के बाद भी रेलवे ने ट्रेन नहीं चलाने का निर्णय लिया है। इसकी वजह से सभी पॉवर प्लांट पूरी तरह से बंद हो गए हैं और कृषि व सब्जियों की आपूर्ति में कटौती की जा रही है।












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