बिग बी ने खोला अपनी जिंदगी से जुड़ा राज, बताई सरनेम 'बच्चन' के पीछे की कहानी
मुंबई। गांधी जयंती के अवसर पर 'कौन बनेगा करोड़पति' के खास एपिसोड में मेजबान अमिताभ बच्चन समाजशास्त्री बिंदेश्वर पाठक के साथ एक किस्सा साझा करते नजर आएंगे। अभिनेता अमिताभ बच्चन का कहना है कि वे किसी धर्म से नहीं हैं, बल्कि वे एक भारतीय हैं। उन्होंने एक अहम राज खोलते हुए कहा कि, ने कहा, मेरा उपनाम बच्चन का संबंध किसी धर्म से नहीं है, क्योंकि मेरे पिता इन सबके खिलाफ थे।

अमिताभ ने 'केबीसी' के सेट पर बताया, मेरा सरनेम बच्चन किसी धर्म से नहीं है
अमिताभ ने 'केबीसी' के सेट पर बताया, मेरा सरनेम बच्चन किसी धर्म से नहीं है। क्योंकि बाबूजी धर्म और जाति के खिलाफ थे। पहले हमारे परिवार का सरनेम श्रीवास्तव था। मुझे यह कहते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि 'बच्चन' सरनेम को इस्तेमाल करने वाला मैं परिवार का पहला व्यक्ति हूं। जब मैं किंडरगार्टन में प्रवेश ले रहा था, तब बाबूजी से मेरा सरनेम पूछा गया तो अपने तखल्लुस (उपनाम) को परिवार का सरनेम बनाने का फैसला लिया। जब जनगणना करने वाले आते हैं और मुझसे मेरा धर्म पूछते हैं तो मैं हमेशा जवाब देता हूं कि मैं किसी धर्म से नहीं हूं, मैं भारतीय हूं।

अमिताभ ने बाबूजी से जुड़ा रोचक किस्सा शेयर किया
यह एपिसोड गांधीजी के फॉलोअर डॉ. बिंदेश्वर पाठक और दो साल से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीत रहे इंदौर के नगर निगम कमिश्नर आशीष सिंह के साथ शूट किया गया। जो महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर को टेलीकास्ट होगा। शो के दौरान जब बिंदेश्वर पाठक ने कहा कि शौचालय साफ करने वालों के लिए कोई सम्मान नहीं मिलना चिंताजनक बात है। तब अमिताभ ने बाबूजी से जुड़ा रोचक किस्सा शेयर किया।

होली की ऐसे होती घर में शुरुआत
उन्होंने कहा, मैं बताना चाहता हूं कि बाबूजी अपने आसपास के लोगों का बहुत सम्मान करते थे। होली से जुड़ी हमारी एक परम्परा थी कि हर व्यक्ति सबसे बड़े और सम्मानित व्यक्ति के पैरों पर रंग डालकर इस त्योहार की शुरुआत करता था। बाबूजी उस इंसान के पैरों में रंग डालते थे, जिसने उत्सव की शुरुआत से पहले शौचालय साफ किया हो।












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