'सजा पाने वाले सांसद-विधायकों के चुनाव लड़ने पर आजीवन लगे बैन', SC में एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट

मौजूदा वक्त में अगर कोई सांसद-विधायक किसी आपराधिक केस में सजा पाता है, तो उसकी सदस्यता चली जाती है। इसके अलावा उसके 6 साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध रहता है। इस पर सुझाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया को एमिकस क्यूरी बनाया था। जिन्होंने अपनी रिपोर्ट दे दी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई जनप्रतिनिधि किसी आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है, तो उसके आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगना चाहिए। अभी जो 6 साल तक चुनाव से बैन का प्रस्ताव है, उसमें बदलाव की जरूरत है।

Amicus Curiae

हंसारिया ने सिविल सेवकों से संबंधित नियमों की ओर इशारा किया, जिसमें आपराधिक गतिविधियों में जुड़े कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया जाता है। वो भविष्य में कभी भी दोबारा सरकारी नौकरी नहीं कर सकते। उन्होंने इसी तरह का सख्त नियम नेताओं के लिए लागू करने की भी मांग की।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा कि अगर वैधानिक पद पर किसी दोषी को नहीं बैठाया जा सकता है, तो नेताओं को इसमें छूट क्यों? दोषी नेता 6 साल की अवधि के बाद सर्वोच्च विधायी निकायों पर कब्जा कर सकते हैं। कानून निर्माताओं (सांसदों-विधायकों) को ज्यादा पवित्र होना आवश्यक है।

अश्विनी उपाध्याय ने डाली थी याचिका
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली थी। जिसमें उन्होंने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 को चुनौती दी। जिसके तहत दोषी सांसद-विधायकों को सिर्फ 6 साल ही चुनाव लड़ने पर बैन रहता है। इसी पर हंसारिया को एमिकस क्यूरी बनाया गया। ये नियुक्ति के बाद की 19वीं रिपोर्ट है।

वहीं रिपोर्ट में विधायकों-सांसदों के खिलाफ लंबित मुकदमों को तेजी से निपटाने की भी बात कही गई। अभी देश की विभिन्न निचली अदालतों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 5175 मामले लंबित हैं। इनमें से 2116 मामले पांच साल से अधिक समय से लंबित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में सबसे ज्यादा 1377, बिहार में 546 और महाराष्ट्र में 482 मामले हैं।

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