25 सालों में पहली बार अमेठी से नहीं लड़ेगा गांधी परिवार, क्या स्मृति ईरानी को टक्कर दे पाएंगे केएल शर्मा?
इस साल फरवरी के तीसरे सप्ताह में राहुल गांधी ने अमेठी में एक रैली को संबोधित किया था। 2019 में स्मृति ईरानी के हाथों मिली हार के बाद ये पहली बार था जब राहुल गांधी अमेठी में किसी रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान राहुल ने अमेठी के साथ अपने परिवार के रिश्ते के बारे में बात की और इसे प्यार का बंधन बताया।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान अमेठी पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा को अमेठी में उनकी घऱ वापसी के रूप में देखा गया था। इसके बाद से ही ये चर्चा तेज हो गई थी कि राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। लेकिन अब राहुल ने अमेठी से चुनाव लड़ने का इरादा त्याग दिया है। वो इस बार रायबरेली से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

25 वर्षों में यह पहली बार होगा कि गांधी परिवार का कोई सदस्य इस लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेगा। 1967 में एक निर्वाचन क्षेत्र के रूप में निर्माण के बाद से गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले अमेठी का प्रतिनिधित्व तब से लगभग 31 वर्षों तक कांग्रेस के सदस्य द्वारा किया गया है।
पिछले आम चुनाव 2019 में कांग्रेस का ये अभेद्य माना जाने वाला किला टूट गया जब भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी ने राहुल को 55,000 से भी अधिक वोटों से हरा दिया। इस बार यानी 2024 के चुनाव में अमेठी सीट से गांधी परिवार के करीबी किशोरी लाल शर्मा को उतारा गया है।
राहुल गांधी के चाचा संजय गांधी और पिता राजीव गांधी सहित नेहरू-गांधी परिवार के चार सदस्यों ने 1980 से इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। पिछली बार अमेठी से कोई गैर-गांधी 1998 में मैदान में था, जब राजीव गांधी और सोनिया गांधी के करीबी सहयोगी सतीश शर्मा ने चुनाव लड़ा था हालांकि वो भाजपा के संजय सिंह से हार गए थे।
1999 में सोनिया गांधी ने संजय सिंह को 3 लाख से अधिक वोटों से हराकर सीट दोबारा हासिल की थी। इसके बाद सोनिया ने अमेठी सीट राहुल को दे दी और वे खुद रायबरेली चली गईं। राहुल गांधी ने अपना पहला चुनाव 2004 में अमेठी से लगभग 300,000 वोटों से जीता था।
2009 में राहुल ने इससे भी बड़ी जीत हासिल करते हुए करीब पौने चार लाख वोटों से जीत हासिल की। बीजेपी प्रत्याशी प्रदीप सिंह को यहां सिर्फ 5.81 फीसदी वोट मिल पाए थे। 2014 में स्मृति ईरानी के अमेठी सीट पर दावा ठोकने के बाद यहां पर संघर्ष दिखना शुरू हुआ।
इस चुनाव में राहुल को करीब 1 लाख वोटों से जीत हासिल हुई थी। स्मृति ईरानी को 34.38 फीसदी मत मिला। 2019 में चौथी बार चुनाव लड़ते हुए राहुल गांधी, स्मृति ईरानी से अमेठी हार गए।
1967 में अमेठी लोकसभा सीट वजूद में आने के बाद से कांग्रेस यहां पर बस 3 बार हारी है। 1977 में जनता पार्टी से 1980 में बीजेपी से और 2019 में फिर बीजेपी से। इन 3 हारों के अलावा यहां पर कांग्रेस का ही सिक्का चला है।
इस बार कांग्रेस नेता केएल शर्मा अमेठी से स्मृति ईरानी को टक्कर देते नजर आएंगे। मूल रूप से किशोरी लाल शर्मा पंजाब के लुधियाना से ताल्लुक रखते हैं। 1983 के आसपास राजीव गांधी उन्हें पहली बार अमेठी लेकर आए थे। तब से वह यहीं के होकर रह गए।
1991 में राजीव गांधी की मौत के बाद जब गांधी परिवार ने अमेठी से चुनाव लड़ना बंद किया तो भी शर्मा कांग्रेस पार्टी के सांसद के लिए काम करते रहे। उन्हें संगठन ही नहीं परिवार का भी वफादार माना जाता है। केएल शर्मा मृदु भाषी हैं। साधारण तरीके से रहते हैं। कुशल मैनेजर हैं मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि स्मृति ईरानी को उन्हें हराना इतना आसान नहीं होने वाला है।












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