कोरोना वायरस पर चीन से आखिर क्या चाहता है अमेरिका, सामने आई ये बात

नई दिल्ली- अमेरिका चीन पर लगातार आरोप लगा रहा है कि वह कोरोना वायरस को लेकर बहुत कुछ छिपा रहा है। लेकिन, चीन उसकी बातों पर ध्यान देने की जगह कभी दक्षिण चीन सागर पर चालबाजियां शुरू कर देता है तो कभी ऑस्ट्रेलिया से जुबानी जंग शुरू कर देता है। दूसरी तरफ वहां की कम्युनिस्ट पार्टी दुनिया को कोरोना वायरस से लड़ने में मदद की पेशकश करके अपनी छवि बदलने की कोशिश में जुटी है। अब अमेरिका ने कहा है कि चीन दुनिया को कोरोना वायरस में उलझाकर दक्षिण चीन सागर पर आक्रामक रवैया अपना रहा है, लेकिन उसपर अमेरिका की नजर बनी हुई है और वह बाकी देशों के हितों की अनदेखी नहीं होने देगा। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी चीन से कोरोना वायरस की जांच में आखिर क्या सहयोग चाह रहा है, जिसपर चीन जानबूझकर ध्यान नहीं देना चाहता।

चीन की नई चालबाजी, अमेरिका की सख्त चेतावनी

चीन की नई चालबाजी, अमेरिका की सख्त चेतावनी

अमेरिका इस वक्त कोरोना वायरस के खिलाफ भारी जंग लड़ रहा है। लेकिन, इसी दौरान उसने आरोप लगाया है की चीनी सेना दक्षिण चीन सागर में आक्रामक रवैया अपना रही है। अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी एक तरफ तो कोरोना वायरस पर अपनी दागदार छवि बदलने के लिए झूठ का सहारा ले रही है तो दूसरी तरफ पीएलए दक्षिण चीन सागर में माहौल बिगाड़ने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा, 'चीन की कम्युनिस्ट पार्टी जहां झूठ की मुहिम छेड़कर दूसरों पर दोष लगाने की कोशिशों में है और अपनी छवि सुधारना चाहती है, वहीं हम लगातार दक्षिण चीन सागर में पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी का आक्रामक बर्ताव देख रहे हैं, जिसमें फिलीपींस की नौसेना के जहाज को धमकाने से लेकर वियतनाम के मछली मारने वाली नौका को डुबोने और क्षेत्र में तेल और गैस निकालने के प्रयासों में जुटे दूसरे देशों पर दबाव डालना भी शामिल है। '

दक्षिण चीन सागर पर चीन को अमेरिका का संदेश

दक्षिण चीन सागर पर चीन को अमेरिका का संदेश

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले हफ्ते अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों ने दक्षिण चीन सागर में जाकर चीन को साफ संदेश दे दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में जहाजों की मुक्त आवाजाही और छोटे-बड़े सभी देशों के व्यापारिक हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के ज्यादातर देश वैश्विक महामारी से निपटने की कोशिशों में जुटे हैं, अमेरिका के रणनीतिक प्रतियोगी दूसरों की कीमत पर हालात का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश में हैं।

शुरुआती मरीजों-डॉक्टरों तक पहुंच चाहता है अमेरिका

शुरुआती मरीजों-डॉक्टरों तक पहुंच चाहता है अमेरिका

जब उनसे सवाल पूछा गया कि अमेरिका कोरोना वायरस से जुड़ी जांच में चीन से किस तरह का सहयोग चाहता है, जो वह इनकार कर रहा है। इसपर उन्होंने कहा कि चीन को अमेरिका को कोविड-19 के शुरुआती मरीजों, चीन के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों तक पहुंचने की इजाजत देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि, 'अगर वे पहले से पारदर्शिता अपनाए रखते, खुले होते, हमें आगे बढ़कर पहुंच देते, रिपोर्टिंग होने देते, जमीनी स्तर के लोगों तक हमें पहुंचने देते तो....., लेकिन उन्होंने वायरस की वजह से ऐसा नहीं होने दिया यह हम समझ सकते हैं, हम आज शायद कहीं अलग स्थिति में होते। लेकिन, आज हम कहा हैं यह पता है....'

वायरस छोड़कर छवि बदलना चाहता है चीन

वायरस छोड़कर छवि बदलना चाहता है चीन

उन्होंने कहा कि वायरस की जांच में सहयोग के बजाय चीन आज अपनी छवि बदलने में लगा हुआ है, अच्छा इंसान बनना चाह रहा है। 'उन्होंने जो कुछ किया या जो करने में पूरी तरह से नाकाम रहे, अब चाहते हैं कि दुनिया के पास जाएं और बोलें कि अच्छा ये मास्क है। हम आपको मास्क देंगे, ये देंगे या वो देंगे, हम आपको फंड देंगे। देखिए हम कितना अच्छा काम कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि 'हमें पता है कि वह किस तरह का सामान दे रहे हैं। टूटे हुए उपकरण भेज रहे हैं। लेकिन, वह कह रहे हैं कि आप मास्क ले जाइए, लेकिन लोगों से सार्वजनिक तौर पर कहिए कि चीन कितना अच्छा है, हम कितना महान काम कर रहे हैं, आदि-आदि।' इस दौरान उन्होंने चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच जुबानी जंग का भी हवाला दिया और कहा कि वो ऑस्ट्रेलिया में भी अपने समकक्ष से बात कर रहे हैं।

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