'बातचीत किए बिना IPC को हटाया गया', नए कानून के लागू होने से क्यों नाराज हैं नोबेल विजेता अमर्त्य सेन?
Amartya Sen News: नोबेल पुरस्कार विजेता और अनुभवी अर्थशास्त्री और दार्शनिक अमर्त्य सेन ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता (IPS) को हटाकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के लागू से खफा हैं। अमर्त्य सेन ने कहा है कि आईपीसी को बीएनएस से बदलना कोई 'स्वागत करने वाला परिवर्तनकारी काम' नहीं है।
अमर्त्य सेन ने कहा है कि, कानून में बदलाव सभी हितधारकों से बातचीत किए बिना किया गया है। उनका कहना है कि IPC को हटाने से पहले और भारतीय न्याय संहिता को लागू करने के लिए सभी हितधारकों से व्यापक तौर पर चर्चा नहीं की गई है।

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अमर्त्य सेन क्यों 'भारतीय न्याय संहिता' से नाराज हैं?
अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में संवाददाताओं से कहा, "सभी संबंधित पक्षों से चर्चा किए बिना बहुमत की मदद से इस तरह का बदलाव लाने के किसी भी कदम को स्वागत योग्य बदलाव या अच्छा बदलाव नहीं कहा जा सकता। और मेरे हिसाब से यह अच्छा संकेत नहीं है।"
अमर्त्य सेन ने यह भी कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, दो अलग-अलग राज्यों द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दे जरूरी नहीं कि एक जैसे हों। ऐसे में बिना गहन चर्चा के इसे लागू करना उचित नहीं है।
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अमर्त्य सेन ने कहा- BNS को लागू करने से पहले व्यापक बातचीत के सबूत नहीं!
अमर्त्य सेन ने कहा, "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बीएनएस को लागू करने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक बातचीत की गई थी। साथ ही इस विशाल देश में, मणिपुर जैसे राज्य और दूसरे राज्य, जैसे कि मध्य प्रदेश, द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं एक जैसी नहीं हो सकतीं।" नई शिक्षा नीति 2020 के बारे में बात करते हुए अमर्त्य सेन ने कहा, "नई शिक्षा नीति में बहुत ज्यादा नवीनता नहीं है।"
1 जुलाई से लागू हुआ है नया कानून
तीन नए आपराधिक कानून - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएनए) 1 जुलाई 2024 को लागू हुए। इन्हें पिछले साल दिसंबर में संसद द्वारा पारित किया गया था। इन कानूनों ने औपनिवेशिक भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान ले लिया है।
अमर्त्य सेन ने लोकसभा चुनाव 2024 पर क्या कहा?
अमर्त्य सेन ने हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों पर अपनी टिप्पणियों को दोहराते हुए कहा कि नतीजों से पता चलता है कि हिंदुत्व की राजनीति को नाकाम कर दिया गया है। अमर्त्य सेन ने कहा, "चुनाव के नतीजे दर्शाते हैं कि इस तरह की (हिंदुत्व) राजनीति को कुछ हद तक नाकाम कर दिया गया है।"
इंडिया ब्लॉक पार्टियों ने निचले सदन में भाजपा का प्रतिनिधित्व कम कर दिया, जिससे भगवा पार्टी 2019 के लोकसभा चुनावों में 303 से घटकर 240 सीटों पर आ गई।
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