MK-1A Arjun Tank की खासियत, जिसे पीएम मोदी ने सेना को है सौंपा, कहा जाता है हंटर किलर
Mk-1A Arjun Battle Tank: नई दिल्ली। चेन्नई पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ही निर्मित अर्जुन युद्धक टैंक MK-1A को भारतीय सेना को सौंप दिया। चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने इस टैंक को स्वीकार कर भारतीय सेना में शामिल हो गया। जल्द ही 118 अर्जुन टैंक शामिल होकर भारतीय सेना की आक्रमण की धार को और मजबूत करेंगे। इसके साथ ही अर्जुन युद्धक टैंक को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पूरी तरह स्वदेश में निर्मित
इस टैंक की सबसे बड़ी खासियत है कि ये टैंक पूरी तरह से देश में ही डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया है। इसे डीआरडीओ और सीवीआरडीई ने 15 अलग एकेडमिक संस्थान, 8 लैब और कई सारे सूक्ष्म और लघु उद्योगों के साथ मिलकर तैयार किया है।
ये टैंक सेना को आज मिला है लेकिन इसकी तैयारी 50 साल पहले शुरू हुई थी। अर्जुन युद्धक टैंक प्रोजेक्ट की शुरुआत 1972 में हुई थी जब रक्षा एवं अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने युद्धक वाहन अनुसंधान और विकास इकाई (सीवीआरडीई) के साथ इस पर काम शुरू किया था। 1971 का युद्ध हो चुका था और तब तक भारत विदेशों से आ रहे हथियारों पर ही आश्रित था। ऐसे में उस समय भारत का उद्येश्य एक ऐसा युद्धक टैंक तैयार करना था जो बेहतर फायर क्षमता, उच्च गतिशीलता और सुरक्षा की दृष्टि से अत्याधुनिक टैंक बनाना था जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों पर भारी पड़े।

दिन-रात हमेशा हमला करने में सक्षम
इस टैंक को बनाने के दौर में इंजन, ट्रांसमिशन, हाइड्रोपॉफिक सस्पेंशन, पतवार और बुर्ज के साथ-साथ गन कंट्रोल सिस्टम में सफलता हासिल की। 1996 में तमिलनाडु के अवडी में भारतीय आयुध निर्माणी की प्रोडक्शन यूनिट में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरू किया गया। MK-1A ने इसका नया एडवांस्ड वर्जन है जिसमें कई सारी नई तकनीकें जोड़ी गई हैं जो इसे दुश्मनों के लिए और भी घातक बना देती हैं।
अर्जुन टैंक अपनी बेहद ही सटीक कवच भेदी 120 एमएम कैलिबर की राइफल गन के लिए जाना जाता है। इसका फायर कंट्रोल सिस्टम कम्यूटर द्वारा संचालित है जो दिन और रात किसी भी समय काम करने में सक्षम है। अर्जुन टैंक के पिछले वर्जन में 14 बड़े अपडेट करके इसका मार्क 1A वर्जन बनाया है इसी वजह से इसे MK-1A या फिर M-1A भी कहा जाता है।

इसलिए कहा जाता है हंटर किलर
टैंक के इस वर्जन में 7.62 एमएम की मशीन गन और 12.7 एमएम की मशीनगन भी लगाई गई है जो एंटी एयरक्राफ्ट और जमीन पर लक्ष्य भेदने में माहिर है। अपनी मारक और बचाव क्षमता के चलते यह विश्वस्तरीय टैंक की श्रेणी में शामिल है।
अर्जुन टैंक के एडवांस्ड वर्जन में नई तकनीक का ट्रांसमिशन इसे वह ताकत देता है कि यह छिपे हुए दुश्मनों को भी ढूढ़ सकता है और उन्हें निशाने पर लेकर टर्मिनेट कर सकता है। इसी वजह से इस टैंक को हंटर किलर के नाम से भी जाना जाता है। इसके साथ ही इसमें लगे खास सेंसर रासायनिक हमले से भी इसकी रक्षा करते हैं।

भारतीय सेना में कितने अर्जुन टैंक
भारतीय सेना ने पहली बार 2004 में 16 अर्जुन टैंक प्राप्त किए थे जिन्हें 43 बख्तरबंद रेजीमेंट में स्क्वाड्रन किया गया था। 2009 में पहली अर्जुन रेजीमेंट को 45 टैंक मिले। 2011 तक 100 टैंकों की डिलीवरी की जा चुकी थी। 2010 में भारतीय सेना ने और 124 अर्जुन टैंक खरीदने का फैसला किया था। इसके बाद अब रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ से 118 और अर्जुन टैंक MK-1A देने को कहा है। 118 टैंक के लिए 8400 करोड़ रुपये का सौदा किया गया है।
इन टैंक के लिए भारतीय सेना में दो रेजीमेंट बनाए जाएंगे। इनमें से एक रेजीमेंट की तैनाती पश्चिमी राजस्थान में होगी। पश्चिमी राजस्थान पाकिस्तान की सीमा से सटा इलाका है जिसका मतलब यह हुआ कि इन टैंकों के वहां होने से पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी स्थिति में इनका उपयोग किया जा सकेगा।












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