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किसका था वो वॉट्सऐप मैसेज, जिसे बताने से अखिलेश यादव ने इंकार कर दिया

अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर और आसपास के जिलों में जिन मांओं ने अपने बच्चे खोए और उस पर भाजपा के लोगों ने जैसी बयानबाजी की, उसका बदला मतदाताओं ने लिया।

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    नई दिल्ली। यूपी के उपचुनाव में धमाकेदार जीत हासिल करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह दलितों, पिछड़ों और वर्तमान भाजपा सरकार में सताए गए लोगों की जीत है। नौजवान सपा कार्यकर्ताओं को जीत का श्रेय देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अगर ईवीएम खराब ना होती तो जीत का अंतर और बड़ा होता। इस दौरान एक मौका ऐसा भी आया जब पत्रकारों के एक सवाल पर अखिलेश यादव ने जवाब ने ठहाके लगवा दिए।

    'किसी को नहीं बताऊंगा कि मुझे किसने मैसेज भेजे'

    'किसी को नहीं बताऊंगा कि मुझे किसने मैसेज भेजे'

    अखिलेश यादव जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फूलपुर और गोरखपुर में जीत के लिए कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दे रहे थे तो उसी दौरान एक पत्रकार ने पूछा कि क्या उनके पास कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का भी बधाई संदेश आया है। इस सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा, 'उपचुनाव में जीत के बाद मेरे पास किस-किस के वॉट्सऐप मैसेज आए हैं, ये मैं किसी को नहीं बताऊंगा। मैं किसी को नहीं बताऊंगा कि मुझे किस-किसने मैसेज किए।' अखिलेश यादव के इस जवाब पर वहां मौजूद सभी लोग ठहाके मारकर हंस पड़े।

    'उम्मीद है अब भाजपा का अहंकार कम होगा'

    'उम्मीद है अब भाजपा का अहंकार कम होगा'

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर और आसपास के जिलों में जिन मांओं ने अपने बच्चे खोए और उस पर भाजपा के लोगों ने जैसी बयानबाजी की, उसका बदला मतदाताओं ने लिया। उन्होंने कहा कि अंहकार ने भाजपा को हराया। उन्होंने कहा कि वो उम्मीद करते हैं भाजपा के लोगों का अहंकार अब कम होगा और वो लोग प्रदेश के विकास पर ध्यान देंगे।

    सपा-बसपा के सामने नहीं टिकी भाजपा

    सपा-बसपा के सामने नहीं टिकी भाजपा

    गौरतलब है कि यूपी की दोनों सीटों पर हुए उपचुनाव में बसपा ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने दोनों सीटों पर सपा के उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया था। सपा-बसपा के इस अघोषित गठबंधन के सामने भाजपा नहीं टिक पाई और दोनों बड़ी सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। इस जीत के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर सपा और बसपा में भावी गठबंधन की संभावनों पर भी चर्चा होने लगी है।

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