वक्फ बोर्ड की पावर कम करने की तैयारी पर बोले अखिलेश यादव, कहा-'हम लोग इसके खिलाफ रहेंगे'
केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्ति को वक्फ संपत्ति बनाने पर अंकुश लगाने के लिए एक विधेयक ला सकती है। इसे लेकर बवाल खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर कहा है कि बीजेपी के पास हिंदू-मुसलमान करने या किसी का अधिकार छीनने के अलावा कोई काम नहीं है। मुस्लिम भाइयों को जो अधिकार मिले हैं। आजादी का अधिकार या अपने धर्म को मानने का अधिकार, अपनी कार्य प्रणाली को बनाए रखने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि सीएम योगी पता चला कि नजूल एक उर्दू शब्द है। अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि नजूल का मतलब कुछ और है। लेकिन उन्हें लगा कि नजूल का मतलब मुसलमानों की जमीन है। उन्होंने आगे कहा कि जिन्हें आरक्षण, पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की चिंता है। उन्हें तुरंत बीजेपी छोड़ देनी चाहिए। कुछ स्टूल-किट नेता हैं। उन्हें जाति जनगणना और आरक्षण के बारे में बात करनी चाहिए।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि मुसलमान भाइयों के अधिकारों को कैसे छीना जाए या उन्हें जो अधिकार मिले हैं। आजादी के अधिकार। उनके स्वतंत्रता के जो अधिकार है उनके अपने धर्म को लेकर। अपनी कामकाज की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए। केवल वक्फ बोर्ड ही नहीं हमारे मुख्यमंत्री जी देखिए कितने समझदार हैं। उन्हें जब यह पता लगा कि नजूल उर्दू शब्द है। अधिकारी उन्हें समझाते रहे कि नजूल का मतलब कुछ और है। लेकिन उन्होंने कहा कि नहीं नजूल मतलब मुसलमान की जमीन है। जो व्यक्ति केवल नजूल शब्द को लेकर के पूरा प्रयागराज खाली करा दे। पूरा गोरखपुर और गोरखपुर में उनका अपना स्वार्थ है कुछ या उनके साथियों का स्वार्थ है। नजूल शब्द को लेकर मुख्यमंत्री जी क्या कानून ले आए यह बात आपको भी समझ में आ रही है। लेकिन हम लोग इसके खिलाफ रहेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि इन्होंने पहले एंग्लो इंडियन का छीना था। आपको पता होगा। एंग्लो इंडियन की पहले लोकसभा में और विधानसभा में एक सीट हुआ करती थी। उनका रिप्रेजेंटेशन था। इन्होंने जनगणना कर दी फर्जी। इन्होंने फर्जी जनगणना कराई। फर्जी जनगणना कराकर इन्होंने एंग्लो इंडियन की एक सीट भी छीन ली। अभी सुनने में आ रहा है कि एक मंत्री जी चिल्ला रही हैं कि आरक्षण खत्म हो गया। आप खुद सोचिए सरकार में भी रहेंगे। आरक्षण की भी बात करेंगे। आरक्षण की चिंता है। जो पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और आदिवासी भाई-बहन है। चाहे वह दिल्ली में हो चाहे लखनऊ में। तुरंत बीजेपी को छोड़ दें।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि एक स्टूल किट नेता है। वह बहुत किट-किट कर रहे हैं। मुझे लगता है उनका ऑफर मुझे खत्म करना पड़ेगा। सुनने में आ रहा है कि जो स्टूल किट मंत्री हैं। यह उधार पर बैठे हुए हैं। उन्हें हुकुम मिलता है। कभी इधर कभी उधर। कभी उधर कभी इधर। कम से कम इन्हें कास्ट सेंसेस की बात करनी चाहिए। जातीय जनगणना की बात करनी चाहिए और जो आरक्षण खत्म हो रहा है। उसकी बात करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारा एक साथी बता रहा है। सहारनपुर में जिस तरह की घटना हुई है। पीलीभीत में एक महिला खेत में गई। उसके साथ गलत घटना हुई। आज सुनने में आ रहा है। अयोध्या में भी घटना हुई है। कन्नौज में एक दलित से समुदाय की बेटी के साथ जो घटना हुई। पुलिस और बीजेपी के लोगों ने मिलकर एक झूठी कहानी बनाई। उसे पेड़ पर लटकाकर बताया कि उसने पेड़ से लटक कर आत्महत्या की। उसका पोस्टमार्टम नहीं हुआ। यह पोस्टमार्टम किसकी वजह से नहीं हुआ है। वहां के बीजेपी के नेता हैं। जिनकी वजह से पोस्टमार्टम उस बेटी का नहीं हुआ है। हम तो आपकी तरफ से मांग करेंगे जिस बेटी को पेड़ पर लटकाया गया था कन्नौज में। जिसका पोस्टमार्टम नहीं हुआ। उसका दोबारा पोस्टमार्टम करके। उसमें जो बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। उन पर भी इसी तरह बुलडोजर चलाया जाए।
उधर पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पलटवार करते हुए कहा कि वक्फ प्रणाली को संपर्क से बाहर निकालने की जरूरत है। मैं नहीं सोच रहा हूं। समावेशी सुधार पर सांप्रदायिक मानसिकता थोपना न तो देश के लिए अच्छा है और न ही समुदाय के लिए। लंबे समय से लंबित समस्या का तार्किक समाधान ढूंढना वक्फ और वक्त दोनों के लिए अच्छा है। मुझे नहीं पता कि सरकार का वास्तविक प्रस्ताव क्या है। लेकिन मेरा मानना है कि इसकी जरूरत है।
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जो वक्फ व्यवस्था है। जो वक्फ सिस्टम है। उसको टच मी नोट। उसको सोच, सनक और संकीर्ण सियासत से बाहर करना होगा। अगर आप इसी संकीर्ण सियासत में। इसी संकीर्ण सोच में और इसी सनक में रहेंगे कि वक्फ व्यवस्था को आप छू नहीं सकते। यह छुईमुई है। हर समावेशी सुधार है। उस पर सांप्रदायिक वार की आपकी जो सनक है। वह ना तो मुल्क के लिए बेहतर है और ना मजहब के लिए बेहतर है। एक लंबे समय से चली आ रही समस्या का तार्किक निवारण वक्फ के लिए भी बेहतर है और वक्त के लिए भी जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि इस बीमारी के इलाज के लिए अलग-अलग संशोधन करते रहे। लेकिन बीमारी का इलाज होने के बजाए यह बीमारी लाइलाज होती रही। मुझे मालूम नहीं है कि इसे लेकर केंद्र सरकार का क्या प्रस्ताव है। लेकिन मैं मानता हूं कि यह जरूरी है। एक लंबे समय से चली आ रही समस्या का तार्किक निवारण देश के हित में भी है और खुद वक्फ के हित में भी है। कुछ लोगों की आदत है। हर समावेशी सुधार पर, हर संवैधानिक सुधार पर सांप्रदायिक वार करने की। यह लोग इसके पुराने खिलाड़ी बन गए हैं कि अगर कोई समावेशी सुधार होगा उसे पर सांप्रदायिक वार करेंगे।












Click it and Unblock the Notifications