चौधरी चरण सिंह की विरासत को लेकर सियासत गरम
लखनऊ। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के सरकारी बंगले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में भी हलचल पैदा हो गई है। सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) को भी इसमें अपना फायदा नजर आने लगा है। सपा ने चरण सिंह को भारत रत्न दिये जाने की मांग उठाकर जहां जाटों की सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जाट बिरादरी की नाराजगी का डर सता रहा है।

रालोद का कहना है कि चौधरी अजित सिंह जिस बंगले में रह रहे हैं, उससे उनके पिता चौधरी चरण सिंह की यादें जुड़ी हुई हैं, लिहाजा उसे किसान ट्रस्ट के नाम पर आबंटित कर दिया जाए लेकिन केंद्र सरकार इस पर राजी नहीं है। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि 12 तुगलक रोड पर भारतीय किसान ट्रस्ट का एक कार्यालय बहुत पहले से ही चल रहा था और उसका बकायदा पंजीकरण भी करवाया गया था, लेकिन यह बंगला उसके नाम पर आबंटित नहीं हुआ था।
बकौल चौहान, "इस मुद्दे को लेकर 23 सितंबर को दिल्ली में 12 तुगलक रोड पर ही बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में चौधरी चरण सिंह विचार मंच व भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसी बैठक में तय किया जाएगा कि इस मुद्दे पर पार्टी का अगला कदम क्या होगा।" चौहान ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि चौधरी अजित सिंह तो मकान खाली करने के लिए राजी भी हो गए थे लेकिन जानबूझकर उनके आवास का बिजली और पानी का कनेक्शन काटा गया।
केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए चौहान ने कहा कि भाजपा यह दलील दे रही है कि रालोद ने यह मुद्दा पिछले 30 वर्षो में क्यों नहीं उठाया। बकौल चौहान, "हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहते हैं कि आम चुनाव के ठीक पहले ही उन्हें सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम पर 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' बनाने की याद क्यों आई थी। वह गुजरात में तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके थे। यह काम तो वह बहुत पहले कर सकते थे लेकिन राजनीतिक फायदा उठाने के लिए ही उन्होंने आम चुनाव से ठीक पहले यह राग छेड़ा था।"
इस बीच चौधरी अजित सिंह के बंगले को लेकर चल रही सियासत में सपा भी कूद पड़ी है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से पश्चिमी उप्र में सपा की सियासी जमीन में दरार पड़ चुकी है। बंगले को लेकर हो रही सियासत के बहाने सपा जाटों की सहानुभूति बटोरने की फिराक में है। एक खास रणनीति के तहत सपा ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई है।
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि पार्टी हमेशा से ही किसानों के साथ है। सपा के मन में हमेशा ही चौधरी चरण सिंह के प्रति सम्मान की भावना रही है। मुलायम सिंह ने ही मेरठ विश्वविद्यालय का नाम बदलकर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय रखा था। उन्होंने कहा कि पार्टी का यह मानना है कि चौधरी चरण सिंह के नाम पर दिल्ली में एक स्मारक भी बनना चाहिए और उन्हें भारत रत्न भी दिया जाना चाहिए।
इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता अंदरखाने यह बात स्वीकार कर रहे हैं कि उपचुनाव के लिए 13 सितम्बर को मतदान होना था, लेकिन उससे ठीक पहले अजित सिंह के बंगले के मुद्दे ने काफी तूल पकड़ लिया और इसका प्रभाव उपचुनाव पर भी पड़ा। पश्चिमी उप्र में पार्टी को जाटों का विरोध भी झेलना पड़ा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, "हमने तो आला कमान को आगाह भी किया था कि मतदान से पहले यह मुद्दा पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित होगा। बंगले के मुद्दे को लेकर पश्चिमी उप्र में किसान यूनियन से जुड़े कई नेताओं का फोन बराबर आ रहा है, लेकिन प्रदेश नेतृत्व क्या करे। यह फैसला तो केंद्र सरकार के हाथ में है।"












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