चीन से कितना अलग होगा दिल्ली के कनॉट प्लेस में लगने वाला स्मॉग टावर?
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में लगने वाला स्मॉग टावर, चीन में लगे स्मॉग टावर से कितना अलग होगा।
नई दिल्ली। अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण ने दस्तक दे दी है। शनिवार को दिल्ली में हवा का स्तर 'खराब' कैटेगरी में रहा और आईटीओ, जहांगीरपुरी सहित कई इलाकों में वायु की गुणवत्ता (AQI) 250 से ऊपर दर्ज की गई। वहीं, दिल्ली की केजरीवाल सरकार भी प्रदूषण से निपटने में जुट गई है। दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए राजधानी के कनॉट प्लेस इलाके में एक 'स्मॉग टावर' खड़ा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही अरविंद केजरीवाल ने यह भी बताया कि दिल्ली में लगने वाला स्मॉग टावर, चीन में लगे स्मॉग टावर से कितना अलग होगा।
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कैसे काम करेगा कनॉट प्लेस का स्मॉग टावर
सीएम अरविंद केजरीवान ने ऑनलाइन मीडिया ब्रीफ्रिंग में बताया, 'दुनिया के अंदर दिल्ली ऐसा दूसरा शहर होगा, जहां स्मॉग टावर लगेगा। एक स्मॉग टावर केंद्र सरकार आनंद विहार में लगा रही है, जबकि दूसरा टावर दिल्ली सरकार की तरफ से कनॉट प्लेस में लगाया जाएगा। कनॉट प्लेस में लगने वाले स्मॉग टावर की टेक्नोलॉजी चीन में लगे स्मॉग टावर से काफी अलग होगी। यह स्मॉग टावर ऊपर से आस-पास की प्रदूषित हवा को सोखेगा और इसके नीचे से साफ हवा निकलेगी। चीन में जो टावर लगा हुआ है, उसमें ऊपर की तरफ से साफ हवा निकलती है।'

पेड़ों को बचाने के लिए बनाया जाएगा पैनल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इसके साथ ही सरकार ने दिल्ली में विकास कार्यों के कारण काटे जाने वाले पेड़ों की कटाई रोकने के लिए एक 'वृक्ष प्रत्यारोपण नीति' को भी मंजूरी दी है। पर्यावरण को बचाने के लिए देश में यह अपनी तरह की पहली नीति होगी। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि सरकार की नई पॉलिसी दिल्ली को हरा-भरा और साफ रखने में काफी अहम साबित होगी। इसके तहत किसी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटने पर संबंधित एजेंसी को 80 फीसदी पेड़ों को दूसरी जगह पर ट्रांसप्लांट करना होगा। इसके लिए एक पैनल बनाया जाएगा जो इस काम की निगरानी करेगा।

सरकार ने शुरू किया 'युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध' अभियान
अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'दिल्ली में विकास कार्य के लिए अगर किसी भी विभाग को पेड़ काटने की जरूरत है, तो उन्हें वृक्ष प्रत्यारोपण के लिए इस पैनल की मदद लेनी होगी। पैनल यह सुनिश्चित करेगा कि दूसरी जगह लगाए सभी 80 फीसदी पेड़ जीवित रहें। इस काम के लिए भुगतान भी तभी किया जाएगा, जब एक साल बाद यह सुनिश्चित कर लिया जाएगा कि सभी 80 फीसदी पेड़ जीवित हैं। इसके अलावा सरकार स्थानीय समितियों का भी गठन करेगी, जिसमें वहां के नागरिकों को शामिल किया जाएगा, जो इन पेड़ों का रख-रखाव और निगरानी करेंगे।' आपको बता दें कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के लिए 'युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध' नाम से एक अभियान चलाया हुआ है और राज्य कैबिनेट के ये दोनों फैसले उसी अभियान का हिस्सा हैं।












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