1978: एयर इंडिया से निकाले जाने पर टाटा को इंदिरा ने लिखी थी ये चिट्ठी, जेआरडी ने भी दिया था भावुक जवाब
दिल्ली, 9 अक्टूबर। एयर इंडिया को फिर से टाटा समूह ने खरीद लिया है। ऐसे में, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एयर इंडिया से जुड़ी पुरानी याद को शेयर किया है। 1 फरवरी 1978 को मोरारजी देसाई सरकार ने एयर इंडिया की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाने वाले तत्कालीन चेयरमैन जेआरडी टाटा को पद छोड़ने को कहा था। साथ ही, उनको इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के बोर्ड से हटा दिया था। तब इंदिरा गांधी ने जेआरडी टाटा को पत्र लिखकर दुख जताया था और एयर इंडिया को बनाने में उनकी भूमिका की काफी तारीफ की थी। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इंदिरा गांधी और जेआरडी टाटा के बीच फरवरी 1978 में हुए पत्राचार को ट्वीट किया है। इंदिरा की चिट्ठी पढ़कर जेआरडी टाटा भावुक हुए और उन्होंने भी जवाब दिया। अप्रैल 1980 में इंदिरा गांधी जब सत्ता में लौटीं तो उन्होंने जेआरडी टाटा को फिर से इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के बोर्ड में शामिल किया लेकिन चेयरमैन का पद उनको नहीं मिल सका।

जयराम रमेश ने किया पत्रों को ट्वीट
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए लिखा- फरवरी 1978 में मोरारजी देसाई सरकार ने जेआरडी टाटा को एयर इंडिया के चेयरमैन पद से हटा दिया था। जेआरडी टाटा मार्च 1953 से इस पद पर थे। हटाए जाने के बाद इंदिरा गांधी और जेआरडी टाटा के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। इंदिरा गांधी उस समय सत्ता से बाहर थीं। उन्होंने जेआरडी टाटा को हाथ से चिट्ठी लिखी थी। जयराम रमेश ने दोनों पत्रों को ट्वीट किया। आइए जानते हैं कि उनमें क्या लिखा था?

इंदिरा गांधा ने टाटा को लिखा ये पत्र
डियर जे,
आप अब एयर इंडिया के साथ नहीं है, यह जानकर मैं दुखी हूं। एयर इंडिया भी आपसे अलग होकर दुखी होगा। आप सिर्फ चेयरमैन नहीं थे, आप एयर इंडिया के संस्थापक और पालक थे। आपका एयर इंडिया से गहरा भावनात्मक लगाव था। आपने एयर इंडिया की साज-सज्जा से लेकर होस्टेस की साड़ी तक, छोटी-छोटी चीजों का इतना ध्यान रखा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बनी और एयर इंडिया दुनिया में एयरलाइंस की सूची में शीर्ष में जगह पाने में कामयाब रहा।
हमें आप पर गर्व है और एयरलाइन को भी है। आपसे यह उपलब्धि और संतुष्टि कोई छीन नहीं सकता, इसको कोई कम नहीं आंक सकता। इस मामले में भारत सरकार आपका ऋणी रहेगी।
हमारे और आपके बीच कुछ गलतफहमियां थीं लेकिन मेरे लिए आपको यह बताना संभव नहीं था कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय में आपसी प्रतिद्वंद्विता के बीच मैं कितने दबाव में काम कर रही थी। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहती।

टाटा ने इंदिरा को पत्र में ये दिया जवाब
डियर इंदिरा,
एयर इंडिया से मुझे भारत सरकार द्वारा हटाए जाने पर आपने जो पत्र लिखने का कष्ट किया, उसके लिए आभारी हूं। एयर इंडिया को बनाने में मेरी भूमिका के बारे में जो भी आपने लिखा उसने मुझे छू लिया। मेरे सहकर्मियों के उत्साह और वफादारी के साथ-साथ भारत सरकार के सहयोग के बिना मैं यह सब नहीं कर पाता। इस मामले में मैं भाग्यशाली रहा।
आशा करता हूं कि आप स्वस्थ हैं और मेरी तरफ से आपको शुभकामनाएं।












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