India Flight Safety Issues: संसद में खुली एअर इंडिया की पोल, 10 में से 7 विमानों में 'खतरनाक' तकनीकी खामियां
India flight safety issues: संसद में पेश हालिया आंकड़ों ने भारतीय विमानन क्षेत्र, विशेषकर एयर इंडिया ग्रुप की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एअर इंडिया समूह के 70% से अधिक विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गई हैं। यह स्थिति तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब हम पिछले साल अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे को याद करते हैं, जिसमें 242 यात्रियों की जान चली गई थी।
इस भीषण त्रासदी के बाद से ही विमानों के रखरखाव और यात्री सुरक्षा को लेकर देश भर में आक्रोश और डर का माहौल है। वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि एयरलाइन की "अत्यधिक सावधानी" के दावों के बावजूद, सुरक्षा मानकों में बड़े सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

Air India Technical Defects: तकनीकी खामियों का गढ़
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, एअर इंडिया ग्रुप के 267 विमानों में से 191 में बार-बार तकनीकी खराबी दर्ज की गई है। अकेले एयर इंडिया के 166 में से 137 विमान इस सूची में शामिल हैं, जो किसी भी अन्य भारतीय एयरलाइन की तुलना में सबसे अधिक हैं।
Air India aircraft recurring issues: एयरलाइन का पक्ष
विमानन कंपनी के अधिकारियों का तर्क है कि इनमें से अधिकांश खामियां 'कैटेगरी D' की हैं, जिनमें खराब सीट, टूटी ट्रे टेबल या स्क्रीन जैसी समस्याएं शामिल हैं। एयरलाइन का दावा है कि ये मुद्दे विमान की उड़ान सुरक्षा (Flight Safety) को प्रभावित नहीं करते हैं और आगामी 'रिट्रोफिट प्रोग्राम' के तहत इन्हें अगले दो वर्षों में ठीक कर लिया जाएगा।
इंडिगो और स्पाइसजेट की क्या है स्थिति?
रिपोर्ट के अनुसार, केवल एयर इंडिया ही नहीं, बल्कि अन्य एयरलाइंस में भी कमियां पाई गई हैं। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo technical flaws) के 405 विमानों में से 148 में तकनीकी मुद्दे मिले। वहीं, स्पाइसजेट के 43 में से 16 और अकासा एयर के 32 में से 14 विमानों में भी बार-बार होने वाली खामियों को चिन्हित किया गया है। कुल मिलाकर, उद्योग के 754 विमानों की समीक्षा में से 377 विमान सुरक्षा जांच के दायरे में आए हैं.
DGCA की निगरानी और नए सुरक्षा उपाय
अहमदाबाद हादसे और इन आंकड़ों के बाद, विमानन नियामक DGCA ने अपनी निगरानी सख्त कर दी है। पिछले एक साल में 3,800 से अधिक निगरानी निरीक्षण और 800 से अधिक स्पॉट चेक किए गए हैं। साथ ही, नियामक क्षमता को मजबूत करने के लिए DGCA में तकनीकी पदों की संख्या 637 से बढ़ाकर 1,063 कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।












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