Bihar News: एआई से बदलेंगे भारत के गांव: खेती से पंचायत तक डिजिटल बदलाव की नई कहानी
AI फॉर ऑल पहल ई-गवर्नेंस, डिजिटल साक्षरता और AI-संचालित सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार करके भारत में समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा दे रही है। सभासार, ई-ग्रामस्वराज, ग्राम मानचित्र और भाषा-समावेशी प्लेटफ़ॉर्म जैसे उपकरण कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में पारदर्शिता, और डेटा-संचालित योजना में सुधार कर रहे हैं।
भारत में ग्रामीण विकास और सुशासन को नई दिशा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की #AIforAll रणनीति और हालिया दिशा-निर्देशों के तहत एआई को समावेशी विकास का प्रमुख माध्यम बनाया जा रहा है, विशेषकर ग्रामीण भारत में। नीति आयोग की 2018 की राष्ट्रीय एआई रणनीति में इसे परिवर्तनकारी तकनीक के रूप में चिन्हित किया गया था। अब बिहार सहित कई राज्य इस दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में राज्य की ओर से कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित सेवाएं दूरदराज के इलाकों तक पहुंच सकें।

ग्रामीण ई-गवर्नेंस में एआई का व्यावहारिक उपयोग तेजी से बढ़ा है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा अगस्त 2025 में लॉन्च किया गया ‘सभासार’ एआई टूल ग्राम सभाओं और पंचायत बैठकों के ऑडियो-वीडियो से स्वतः मिनट्स तैयार करता है। यह ‘भाषिनी’ प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत है और 14 भारतीय भाषाओं में काम करता है, जिससे दस्तावेजीकरण आसान और सटीक हुआ है। इससे मैन्युअल कार्यभार घटा है और अधिकारी पंचायतों के सतत विकास लक्ष्यों पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।
‘ई-ग्रामस्वराज’ प्लेटफॉर्म पंचायतों के बजट, लेखांकन और भुगतान प्रणाली को डिजिटल रूप से एकीकृत करता है। वर्ष 2025-26 तक यह 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। वहीं, ‘ग्राम मानचित्र’ जीआईएस आधारित टूल से परिसंपत्तियों का मानचित्रण और योजनाओं की निगरानी संभव हुई है, जिससे साक्ष्य-आधारित योजना और आपदा प्रबंधन को मजबूती मिली है।
एआई कोष और निगरानी तंत्र
‘एआई कोष’ एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 एआई मॉडल उपलब्ध कराता है। फरवरी 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 69 लाख से अधिक विजिट और 5 हजार मॉडल डाउनलोड दर्ज किए गए हैं। यह ग्रामीण प्रशासन और लोक सेवाओं के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने में सहायक है।
‘भूप्रहरी’ एआई और जीआईएस तकनीक के माध्यम से मनरेगा परिसंपत्तियों की रीयल-टाइम निगरानी करता है। इसे विकसित भारत-गारंटी योजना के तहत बनी परिसंपत्तियों की ट्रैकिंग तक विस्तारित किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
कृषि में एआई का प्रभाव
कृषि मंत्रालय ने किसानों के लिए कई एआई टूल शुरू किए हैं। ‘किसान ई-मित्र’ वर्चुअल असिस्टेंट सरकारी योजनाओं और सहायता की जानकारी देता है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म उपग्रह चित्रों, मौसम और मिट्टी के डेटा के आधार पर रीयल-टाइम सलाह देते हैं। इससे कीट नियंत्रण, सिंचाई और बुवाई का सही समय तय करना आसान हुआ है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है।
शिक्षा और कौशल विकास
एनसीईआरटी के ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म में एआई आधारित वीडियो सर्च और रीड-अलाउड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं। ‘युवा’ (यूथ फॉर उन्नति एंड विकास विद एआई) कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को एआई और डिजिटल कौशल सिखाए जा रहे हैं, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
भाषाई समावेशन में बड़ी भूमिका
‘भाषिनी’ प्लेटफॉर्म 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट और वॉयस इंटरफेस की सुविधा देता है। यह 23 से अधिक सरकारी सेवाओं से जुड़ा है। अक्टूबर 2025 तक 350 से अधिक एआई मॉडल और 10 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए डिजिटल सेवाएं सुलभ हुई हैं और भाषाई विविधता अब सरकारी सेवाओं तक पहुंच में बाधा नहीं बन रही। सरकार का मानना है कि एआई के माध्यम से गांवों में पारदर्शिता, रोजगार, कृषि सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा। डिजिटल तकनीक के सहारे भारत के गांव अब आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।












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