राजस्थान: गुर्जर VS मीणा वोटरों के खेल के चलते हुई किरोड़ी लाल की बीजेपी में वापसी
जयपुर। राजस्थान उपचुनावों में एक के बाद एक हार का सामना करने के बाद मुश्किल में पड़ी बीजेपी ने मीणा वोटरों को साधने के लिए किरोड़ी लाल मीणा को पार्टी में शामिल कर लिया है। 2008 विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले मीणा जयपुर स्थित पार्टी कार्यालय में बीजेपी में शामिल हुए। इस मौके पर राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के अलावा पार्टी के कई शीर्ष नेता मौजूद थे। मीणा के साथ उनकी राष्ट्रीय जनतांत्रिक पार्टी का भी बीजेपी में विलय हो गया है।

किरोड़ी लाल मीणा की घर वापसी के पीछे है अमित शाह की रणनीति
राजस्थान की करीब 29 सीटों पर मीणा वोटरों का दबदबा माना जाता है। किरोड़ी लाल मीणा के बागी तेवरों से राजस्थान की सियासत में हर कोई वाकिफ है। वह कांग्रेस के साथ भी हाथ मिला चुके हैं, लेकिन संघ के बेहद करीब माना जाता है। ऐसे में उनकी घर वापसी को बीजेपी को स्वाभाविक सी घटना बता पेश कर रही है, लेकिन असल वजह कुछ और है। दरअसल, राजस्थान में हर पांच साल बाद सरकार बदलने का ट्रेंड है। दूसरी ओर वसुंधरा के नेतृत्व में पार्टी को एक के बाद एक हार ही मिल रही है। ऐसे में अमित शाह क्षत्रपों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, जिससे वोट बैंक छिटके नहीं।

इस बार मीणा और गुर्जर वोटों का है खेल
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट गुर्जर जाति से आते हैं। ऐसा माना जाता है कि राजस्थान में गुर्जर और मीणा एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। अभी तक जो समीकरण बनते दिख रहे हैं, उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि राजस्थान का अगला चुनाव कांग्रेस सचिन पायलट को सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट करके लड़ेगी। वैसे भी गुर्जर आंदोलन के दौरान वसुंधरा राजे ही सीएम थीं और उनके प्रति गुर्जरों के मन में रोष भाव है। अब अगर कांग्रेस गुर्जर वोटों का गणित जमा रही है तो मीणा वोटरों को साधकर बीजेपी अपना लक्ष्य पाना चाहती है।

1980 से सक्रिय हैं किरोड़ी लाल मीणा
राजस्थान की राजनीति में जगह बनाने के लिए किरोड़ी लाल मीणा ने काफी संघर्ष किया। 1980 में सक्रिय राजनीति में उतरने से पहले वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे थे। आपातकाल के दौरान वह 17 महीने तक जेल में भी कैद रहे।

मीणा ने कभी कांग्रेस से मिलाया था हाथ
मीणा ने 2008 में वसुंधरा राजे सिंधिया के खिलाफ विद्रोह कर दिया था, जब राजे ने मीणा बेल्ट में उनकी पसंद वाले छह प्रत्याशियों को उतारने से इनकार कर दिया था। राजे से नाराज किरोड़ी लाल मीणा उस वक्त कांग्रेस के पास पहुंच गए थे। उन्होंने कांग्रेस से फंड मांगा था, जिससे वह बीजेपी के खिलाफ तूफानी प्रचार कर सकें। ऐसा हुआ भी कांग्रेस ने मीणा को संसाधन मुहैया कराए थे, जिसके बाद बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था।












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