कृषि कानूनों को निरस्त करने के अलावा यदि किसानों के पास कोई विकल्प हो तो हम चर्चा को तैयार- कृषि मंत्री तोमर
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यदि किसानों के पास कृषि कानूनों को निरस्त करने के अलावा यदि कोई विकल्प है तो हम बातचीत करने को तैयार हैं।
नई दिल्ली, 9 जून। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कृषि कानूनों के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि किसान संगठन कृषि कानूनों को निरस्त करने के बजाय इसका कोई विकल्प देना चाहते हैं तो हम बातचीत करने को तैयार हैं। मालूम हो कि सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों को लेकर कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन दोनों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है।
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किसान संगठन जहां एक ओर इन कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार इन्हें वापस न लेने के फैसले पर अड़ी हुई है। कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठन पिछले लगभग 6 महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। पिछले दिनों किसान संगठनों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कृषि कानूनों के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए कहा था।
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कृषि कानूनों को निरस्त करने को लेकर लंबे समय से दिल्ली के बॉर्डर पर जारी कि किसान आंदोलन को और तेज करने की रणनीति पर चर्चा के लिए आज भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत कोलकाता में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से भी मुलाकात करेंगे। बता दें कि किसान संगठनों को डर है कि इन कृषि कानूनों के जरिए केंद्र सरकार बड़ी कंपनियों के भारत आने का मार्ग प्रशस्त कर रही है जो छोटे किसानों के लिए मौत की घंटी की तरह होगा।
खाद्द तेल की कीमत बढ़ने से किसानों का फायदा
कृषि मंत्री ने सरसों के तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर कहा कि सरसों के तेल की कीमत बढ़ गई है क्योंकि सरकार ने शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए तेल में मिलावट बंद कर दी है, इस फैसले से किसानों को फायदा होगा। उन्होंने आगे कहा कि खाद्द तेल की कीमतों पर सरकार की नजर है।












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