पंजाब कांग्रेस के इस दिग्गज नेता ने दिया बयान, हम तो दिल्ली में पहले भी जीरो थे और अब भी

नई दिल्ली। दिल्ली के चुनाव में सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच था। कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर देगी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिखाई दिया। हालांकि कांग्रेस शुरुआत से दिल्ली चुनाव में कहीं रेस में नहीं थी, ये ना सिर्फ अन्य दल के नेता बल्कि खुद कांग्रेस पार्टी के नेता भी मान रहे हैं। दिल्ली में एक भी सीट नहीं जीतने के बाद कांग्रेस के नेता अब खुलकर अपनी पार्टी की किरकिरी पर बयान दे रहे हैं। दिल्ली की हार के बाद पंजाब कांग्रेस के नेता और प्रदेश में सरकार में मंत्री साधु सिंह धरमसोत ने बड़ा बयान दिया है।

यह हार भाजपा की है हमारी नहीं

यह हार भाजपा की है हमारी नहीं

साधु सिंह धरमसोत ने दिल्ली में कांग्रेस की शर्मनाक हार के बाद कहा कि हम पहले भी जीरो थे और अब भी जीरो हैं, लिहाजा यह भारतीय जनता पार्टी की हार है हमारी नहीं। साधु सिंह का यह बयान पार्टी को चुभ सकता है। ना सिर्फ साधू सिंह बल्कि बल्कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने भी पार्टी की हार के बाद कहा कि हम दिल्ली चुनाव में कहीं थे ही नहीं। उन्होंने कहा कि पार्टी की इस हार पर वह कतई आश्चर्यचकित नहीं हैं।

संदीप दीक्षित बोले मैं आश्चर्यचकित नहीं

संदीप दीक्षित बोले मैं आश्चर्यचकित नहीं

संदीप दीक्षित ने कहा, 'कांग्रेस का प्रदर्शन आश्चर्यजनक नहीं है...हम कहीं थे ही नहीं।' इस दौरान उन्होंने पार्टी के नेताओं पर अपनी मां को अपमान करने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस ने जो प्रदर्शन किया है वो आश्चर्यजनक नहीं है...हम कहीं थे ही नहीं। हमने शीला जी द्वारा किए गए काम को दिखाने की कोशिश की, लेकिन यह वास्तव में देर से किया। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का दुर्भाग्य था कि दिल्ली विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सुभाष चोपड़ा को देर से दी गई। साथ ही संदीप दीक्षित ने घटिया प्रदर्शन के लिए दिल्ली कांग्रेस की शिथिलता को कसूवार ठहराया।

दिल्ली कांग्रेस चीफ का इस्तीफा

दिल्ली कांग्रेस चीफ का इस्तीफा

बता दें कि दिल्ली में हार के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने हार की जिम्मेदारी अपने उपर ली है। उन्होंने पार्टी को मिली करारी हार के बाद दिल्ली कांग्रेस चीफ के पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस ना सिर्फ इस चुनाव में बल्कि 2015 के विधानसभा चुनाव में भी अपना खाता नहीं खोल सकी थी। वहीं भाजपा ने पिछले चुनाव में 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार 7 सीटों पर जीत दर्ज की है।

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