क्यों खतरा बना करतापुर कॉरिडोर? "ऑपरेशन सिंदूर" के बाद तुरंत किया गया बंद, भक्तों का लौटाया गया वापस
Kartarpur Corridor: भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर के नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मिसाइल हमले से बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख ठिकानों को उड़ाकर मिट्टी में मिला दिया है।
वहीं भारतीय सेना की इस एयर स्ट्राइक के बाद पंजाब में करतारपुर कॉरिडोर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। जिसके भारत और पाकिस्तान के प्रसिद्ध गुरुदारा में दर्शन करने के लिए सिख तीर्थयात्री नहीं जा सकेंगे।

आपको बता दें पाकिस्तान के करतापुर में दरबार साहिब गुरुद्वारा हैं जहां पर सिख भक्त दर्शन करने इसी करतापुर कॉरिडोर से आते-जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद 7 मई को करतारपुर कॉरिडोर को देश सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बंद कर दिया है।
कब शुरू हुआ था करतारपुर कॉरिडोर से ?
9 नवंबर, 2019 को करतारपुर कॉरिडोर सिख श्रद्धालुओं के लिए शुरू किया था। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर इसे खोला गया था। ये कॉरिडोर पाकिस्तान में स्थित गुरु नानक देव के अंतिम विश्राम स्थल दरबार साहिब गुरुद्वारे को पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक मंदिर से जोड़ता है।
करतापुर कॉरिडोर क्यों बना खतरा?
दरअसल, तीर्थयात्रियों को गुरु नानक देव के गुरुद्वारे स्थल तक जाने के लिए वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा दी गई थी। वर्षों पहले हुए एक समझौते के अनुसार 5,000 तीर्थयात्रियों को जाने की परमीशन हैं लेकिन आज ये कॉरिडोर बंद कर दिया गया। चूंकि यहां से बिना वीजा के भक्त आते-जाते हैं तो इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान यहां से भारत में घुसपैठ कर सकता है।
भक्तों को लौटाया गया?
करतारपुर कॉरिडोर को बंद करने का फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच लिया गया है। कॉरिडोर दो देशों के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है, जिससे हजारों तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के पवित्र और ऐतिहासिक गुरुद्वारें में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों में शामिल होने का मौका मिलता था लेकिन पाकिस्तान की ओछी और कायरना हरकतों के कारण भाई-चारा बढ़ाने वाले इस मार्ग को भी बंद कर दिया।












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