18 साल बाद त्रिपुरा से हटा अफ्सपा, अब बिना वारंट कोई गिरफ्तार नहीं होगा

त्रिपुरा। तकरीबन 18 साल बाद त्रिपुरा से आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पॉवर एक्ट यानि अफ्सपा को हटा लिया गया है। त्रिपुरा सरकार ने आखिरकार बुधवार को अफ्सपा को हटाने का फैसला ले लिया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार ने कहा कि आतंकी घटनाओं में आयी भारी कमी और उसे रोकने में सफल रहने के बाद हम अफ्सपा को हटा रहे हैं।

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हाल ही में त्रिपुरा में सुरक्षा और कानून व्यवस्था का सुरक्षाकर्मियों ने जायजा लिया। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रीपरिषद ने प्रदेश से अफ्सपा को हटाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सरकार ने कहा कि यह फैसला पिछले सालों में आतंकी घटनाओं में आयी कमी के चलते लिया गया है। हालांकि सुरक्षाकर्मी स्थिति पर नजर बनाये रखेंगे।

अफ्सपा कानून के जरिए सेना को असीमित अधिकार प्राप्त होते हैं। इस कानून के अंतर्रगत सेना किसी भी संदिग्ध को देखते ही गोली मार सकती है और बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है। यही नहीं बिना इजाजत किसी की भी तलाशी ले सकती है। यह सब करने के बाद सेना के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

त्रिपुरा में 16 फरवरी 1997 को उस वक्त अफ्सपा लगाया गया था जब प्रदेश में आतंकी घटनायें अपने चरम पर थी जिसकी सीमा बांग्लादेश तक 856 किलोमीटर तक फैली थी। नेशनल लिबरेश फ्रंट ऑफ त्रिपुरा और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स पर अभी भी बांग्लादेश में ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगा है। ये दोनों ही संगठन त्रिपुरा को भारत से अलग किये जाने की मांग करते आये हैं।

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