राजस्थान: कोटा के बाद बूंदी के अस्पताल में एक महीने में 10 बच्चों की मौत
बूंदी। राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में शिशुओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोटा के इस अस्पताल में अब तक 106 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसको लेकर सियासत गरमाई हुई है। वहीं, कोटा के बाद अब राजस्थान के बूंदी में भी दिसंबर महीने में 10 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन बच्चों की मौत को दबाने में जुटा हुआ था।

अतिरिक्त जिला कलेक्टर के औचक निरीक्षण में हुआ खुलासा
शुक्रवार को अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो बच्चों की मौत का खुलासा हुआ, जिसके बाद से हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, बच्चों की मौत पर चिकित्सा विभाग का कहना है कि सभी बच्चे ग्रामीण इलाके से यहां आए थे। इसपर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चों की मौत अलग-अलग कारणों से हुई है, साथ ही अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के कारण 10 बच्चों की मौत होने की बात को खारिज किया।

अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने रिपोर्ट तलब की
ड्यूटी इंचार्ज हितेश सोनी ने कहा कि इनमें से कुछ बच्चे दूसरे अस्पताल से रेफर होने के बाद इलाज के लिए यहां आए थे। कुछ बच्चों का वजन कम था, जबकि कुछ को सांस लेने में तकलीफ थी। उन्होंने कहा कि उनकी हालत बहुत गंभीर थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है और अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया है। अधिकारी ने निर्देश दिया है कि बच्चों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही ना बरती जाए।

कोटा में अब तक 106 बच्चों की मौत
इसके पहले, दिसबंर महीने में कोटा में 100 बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं, जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा अब 106 तक जा पहुंचा है, जिसको लेकर विपक्ष अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साध रहा है। जबकि पूरे मामले पर स्वास्थ्य मंत्री के असंवेदनशील बयान पर भी सियासत गरमाई हुई है। उनसे सवाल किया गया था कि 100 बच्चों की मौत हो गई है, उनका पूरा परिवार सदमे में है, तो क्या वे किसी आर्थिक मदद का ऐलान करेंगे। इसपर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था, 'पहली बार ऐसा हुआ है क्या? मुआवजे के सवाल पर मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।'












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