Afghanistan Row: US पर भड़के जावेद और शबाना, कहा- 'महिलाओं को कट्टरपंथियों के हवाले छोड़ दिया, शर्म करो'

नई दिल्ली, 17 अगस्त। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद से पूरे देश में दहशत का माहौल है। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर जा चुके हैं और बाकी नेता अपनी जान बचाने के लिए दूसरे देशों में शरण ले रहे हैं। जो तस्वीरें सामने आ रही हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात वहां किस हद तक खराब हैं। देश-विदेश से अफगान के हालात पर प्रतिक्रिया जारी है। इस पूरे मामले पर मशहूर शायर-गीतकार जावेद अख्तर और उनकी पत्नी-लोकप्रिय अभिनेत्री शबाना आजमी ने भी प्रतिक्रिया दी है।

'यह क्रूरता की ओर इशारा करता है'

'यह क्रूरता की ओर इशारा करता है'

शबाना आजमी ने ट्वीट किया है कि 'इतिहास हमें सिखाता है कि कट्टरपंथियों ने पहले धर्म की आड़ में संस्कृति पर हमला किया। याद रखें कि #तालिबान ने छठी शताब्दी के बामियान को नष्ट कर दिया। यह क्रूरता की ओर इशारा करता है।'

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    मुझे पश्चिमी देशों पर शर्म आती है: जावेद अख्तर

    मुझे पश्चिमी देशों पर शर्म आती है: जावेद अख्तर

    तो वहीं जावेद अख्तर ने अपने Tweet में अमेरिका पर निशाना साधा है, उन्होंने कहा कि 'अमेरिका किस तरह की महाशक्ति है, वो कैसे तालिबान नामक इन बर्बर लोगों को खत्म नहीं कर सका। यह कैसी दुनिया है जिसने अफगानी महिलाओं को इन कट्टरपंथियों के हवाले छोड़ दिया । उन सभी पश्चिमी देशों पर शर्म आती है जो मानवाधिकारों के रक्षक होने का दावा करते हैं।'

    जावेद अख्तर ने दिया करारा जवाब

    जावेद अख्तर ने दिया करारा जवाब

    जावेद अख्तर का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिस पर काफी लोग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ऐसे ही एक यूजर ने अख्तर के ट्वीट पर ऐसा कुछ लिखा, जिस पर जावेद अख्तर को गुस्सा आ गया उन्होंने उसे करारा जवाब भी दिया।

    अफगान महिलाएं कश्मीर और फ़िलिस्तीन की महिलाओं से अलग हैं?

    दरअसल IAK नाम के यूजर ने लिखा कि ' @Javedakhtarjadu जवाब दें, अफगान महिलाएं कश्मीर और फ़िलिस्तीन की महिलाओं से किस प्रकार अलग हैं? क्या उन पर कट्टरपंथियों द्वारा क्रूरता नहीं दी जा रही है या कश्मीर और फिलिस्तीन में कट्टरपंथियों ने महिलाओं और बच्चों के प्रति दया दिखाई है? क्या आप बच्चों और महिलाओं को पैलेट गन से गोली मारने का वीडियो नहीं देख पाए ?

    क्या तालिबानों का विरोध और निंदा नहीं की जानी चाहिए?

    क्या तालिबानों का विरोध और निंदा नहीं की जानी चाहिए?

    जिस पर जावेद अख्तर ने करारा जवाब देते हुए कहा कि, क्या आप यह कहना चाह रहे हैं कि चूंकि कुछ अन्य जगहों पर भी महिलाओं के साथ अन्याय और क्रूरता होती है, इसलिए तालिबानों का विरोध और निंदा नहीं की जानी चाहिए। यह कैसा लॉजिक है?

    निर्दोष अफगानों की मदद कैसे की जाए?

    इस ट्वीट पर जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर भी कूद पड़े और उन्होंने भी ट्वीट किया है कि 'दुनिया की ताकतों को अभी इस बारे में बात करने की जरूरत है कि निर्दोष अफगानों की मदद कैसे की जाए। आने वाले दिनों और समय में नहीं।

    किसी को डरने की जरूरत नहीं है: तालिबान

    किसी को डरने की जरूरत नहीं है: तालिबान

    मालूम हो कि तालिबान ने कहा है कि वह अफगानिस्तान में खुली और समावेशी इस्लामी सरकार चाहता है, किसी को डरने की जरूरत नहीं है लेकिन अभी भी काबुल से लूटपाट और हिंसा की खबरें आ रही हैं। इसलिए वहां के लोग काफी खौफ में है।

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