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'गांधी जी के भारत से इसकी उम्मीद नहीं थी', जानिए क्यों अफगान की महिला सांसद ने कही इतनी बड़ी बात

नई दिल्ली, 26 अगस्त। अफगानिस्तान की राष्ट्रीय राजधानी काबुल पर कब्जे के 10 दिन बाद अब तालिबान नई सरकार का गठन करने की तैयारी कर रहा है। इस बीच रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग अफगानिस्तान से निकलने का प्रयास कर रहे हैं, भारत ने भी कई अफगानियों को अपने यहां शरण दी है। तालिबान के चंगुल से भारत पहुंचे लोग 'भारत माता की जय' के नारे लगा रहे हैं वहीं, एक अफगान महिला सांसद ने दावा किया कि उसे दिल्ली में एयरपोर्ट से ही वापस उसके देश भेज दिया गया।

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    Afghanistan Crisis: महिला सांसद ने कहा 20 August को Delhi Airport से वापस लौटाया गया |वनइंडिया हिंदी
    अफगान महिला सांसद ने किया बड़ा दावा

    अफगान महिला सांसद ने किया बड़ा दावा

    तालिबान में काबुल पर 15 अगस्त को कब्जा किया था, तब से ही लोग वहां से भाग निकलने की कोशिश कर रहे हैं। अफगान संसद की महिला सदस्य रंगीना कारगर का दावा है कि वह 20 अगस्त को इस्तांबुल से दुबाई होते हुए भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई एयरपोर्ट) पहुंची थीं। एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने उन्हें बाहर नहीं जाने दिया और घंटों हवाई अड्डे पर ही इंतजार कराया। बता दें कि अफगानिस्तान में रंगीना कारगर फरयाब प्रांत का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    पहले भी कई बार की है भारत की यात्रा

    पहले भी कई बार की है भारत की यात्रा

    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब रंगीना कारगर ने दावा किया है कि आईजीआई हवाई अड्डे पर दो घंटे इंतजार कराने के बाद उन्हें वापस उसी एयरलाइन द्वारा दुबई के रास्ते इस्तांबुल डिपोर्ट कर दिया गया। रंगीना का कहना है कि उनके पास भारत-अफगान समझौते के तहत वीजा-मुक्त यात्रा सुविधा देने वाला राजनयिक/आधिकारिक पासपोर्ट है। इसके बावजूद उन्हें एयरपोर्ट से ही डिपोर्ट कर दिया गया। उनका कहना है कि इससे पहले इस पासपोर्ट के जरिए वह कई बार भारत की यात्रा कर चुकी हैं।

    किया गया अपराधी जैसा व्यवहार

    किया गया अपराधी जैसा व्यवहार

    रंगीना कारगर ने यह भी कहा कि इससे पहले उन्हें कभी नहीं रोका गया लेकिन इस बार इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रुकने को कहा और वजह पूछने पर ऑफिसर ने बताया कि उन्हें अपने वरिष्ठों से बात करनी होगी। करगर ने कहा, 'उन्होंने मुझे निर्वासित कर दिया, मेरे साथ एक अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। मुझे दुबई में मेरा पासपोर्ट नहीं दिया गया, वह मुझे इस्तांबुल में वापस दिया गया। उन्होंने मेरे साथ जो किया वह अच्छा नहीं था। काबुल में स्थिति बदल गई है और मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार अफगान महिलाओं की मदद करेगी।

    गांधी जी के भारत से ऐसी उम्मीद नहीं थी

    गांधी जी के भारत से ऐसी उम्मीद नहीं थी

    रंगीना कारगर ने आगे कहा, मुझे डिपोर्ट करने का कोई कारण नहीं बताया गया लेकिन शायद इसकी वजह काबुल में बदली हुई राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा हो सकती है। मैंने गांधी जी के भारत से इसकी कभी उम्मीद नहीं की थी। हम हमेशा भारत के दोस्त रहे हैं, भारत के साथ हमारे सामरिक और ऐतिहासिक संबंध हैं लेकिन इस स्थिति में उन्होंने एक महिला और एक सांसद के साथ ऐसा व्यवहार किया है। अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर मुझसे कहा कि 'क्षमा करें, हम आपके लिए कुछ नहीं कर सकते।

    यह भी पढ़ें: अब पुतिन ने भी दिया अफगानिस्तान से रूसी नागरिकों को निकालने का आदेश, 500 लोग किए जाएंगे एयरलिफ्ट

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