Jamia firing: पुलिस के तमाशबीन बने रहने पर क्या बोलीं अभिनेत्री रिचा चड्ढा
मुंबई। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान गुरुवार को जामिया इलाके में एक युवक ने फायरिंग की है। युवक द्वारा की गई फायरिंग में एक छात्र घायल हुआ है। जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय मौके पर मौजूद पुलिस तमाशाबीन बनी खड़ी रही। पुलिस के रवैए को लेकर लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। फेमस एक्ट्रेस रिचा चड्ढा ने घटना की तुलना एक मुहावरे से की है।

एक्ट्रेस रिचा चड्ढा ने जामिय फायरिंग के दौरान पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया कि, हिंदी का मुहावरा है - हाथ पे हाथ धरे बैठना। लोग सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस की भारी मौजूदगी के बावजूद वो हमलावर हथियार लेकर वहां कैसे जा पहुंचा। जब वह भीड़ पर गोली चला रहा था, तो उस समय कोई पुलिसकर्मी उसे रोकने के लिए आगे नहीं बढ़ा। हालांकि बाद में एक पुलिस अधिकारी ने उसे दबोच लिया।
वहीं AIMIM प्रमुख ने इस दौरान दिल्ली पुलिस पर भी सवाल खड़े किए। ओवैसी ने लिखा कि जो बहादुरी आपने जामिया में दिखाई थी उसका क्या हुआ। अगर असहाय दर्शक का कोई अवॉर्ड मिले तो दिल्ली पुलिस को ही मिलेगा। क्या आप बता सकते हैं कि ये बैरिकेड पार कर कैसे गया? ओवैसी ने इस घटना पर निशाना साधते हुए लिखा कि अब पूरा मामला गोडसे बनाम गांधी-अंबेडकर-नेहरू के देश का हो गया है। लोगों को चुनना है। गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी के ट्वीट का सीधा निशाना बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर के उस बयान पर है जो विवादों में है। अनुराग ठाकुर ने अपने एक भाषण में नारे लगवाए थे, 'देश के गद्दारों को...गोली मारो...'।
सोशल मीडिया पर घटना की तस्वीर डालकर लोग पुलिस की खिंचाई कर रहे हैं। एक यूजर ने कहा है कि आदमी ने खुलेआम हथियार लहराया लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। प्रदर्शनकारियों की ओर शख्स आगे बढ़ रहा था। इस दौरान पुलिस महज चुप्पी साधे हुए देखते रही। घायल युवक की तस्वीर डालकर यूजर ने लिखा कि जब वो खून से लहुलूहान था तो पुलिस ने उसे जाने के लिए रास्ता क्यों नहीं दिया। उसके लिए बैरिकेट क्यों नहीं हटाया गया।












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