अबू सलेम की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई के योग्य नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि अबू सलेम की भारतीय अधिकारियों द्वारा उसके प्रत्यर्पण को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता को एक सक्षम अदालत ने सजा सुनाई थी।
नई दिल्ली, 14 मार्च। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि प्रत्यर्पित गैंगस्टर अबू सलेम की भारतीय अधिकारियों द्वारा उसके प्रत्यर्पण को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता को एक सक्षम अदालत ने सजा सुनाई थी।

अदालत ने उनके वकील को याचिका वापस लेने का निर्देश लेने के लिए समय दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति एके मेंदीरत्ता की पीठ ने कहा कि उनका विचार है कि यह याचिका विचारणीय नहीं है। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि या तो वे इस याचिका को वापस लें या फिर उन्हें इस याचिका को खारिज करना पड़ेगा। इसके बाद अधिवक्ता एस हरिहरन ने याचिका वापस लेने के निर्देश लेने के लिए समय मांगा।
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इसके बाद अदालत ने याचिका को मई 2022 के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले वकील ने इस आधार पर चार सप्ताह का समय मांगा था कि एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा था। वकील ने तर्क दिया कि निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी गई है। संधि के अनुसार, याचिकाकर्ता को 25 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए सजा नहीं दी जा सकती थी, लेकिन उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई थी, जो संधि का उल्लंघन है और इस प्रकार सजा अवैध थी। जिस पर पीठ ने कहा कि अगर प्रत्यर्पण अवैध है तो उसके खिलाफ यहां मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए।
याचिका वापस लें वकील
पीठ ने कहा याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि बंदी प्रत्यक्षीकरण दोषसिद्धि के आदेश के खिलाफ नहीं है। पीठ ने वकील से कहा जब तक आपका दोष सिद्ध नहीं हो जाता, क्या हम कह सकते हैं कि आपकी नजरबंदी अवैध है? यह सुनवाई के योग्य नहीं है। आप इस याचिका को वापस लें। इस पर वकील ने कहा कि उनके पास याचिका को वापस लेने का कोई निर्देश नहीं है। उन्होंने यह कहते हुए याचिका को वापस लेने का समय मांगा कि याचिकाकर्ता अबू सलेम मुंबई की तलोजा जेल में बंद है।
1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट का दोषी है अबू सलेम
गौरतलब है कि 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के आरोपी अबू सलेम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवंबर, 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया था। मुंबई सीरियल ब्लास्ट में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 लोग घायल हुए थे।। मामले में दोषी पाए जाने के बाद सलेम को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। उसे दिल्ली की एक अदालत ने 2002 के रंगदारी मामले में सात साल के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई है।
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