कोरोना से लड़ने को 99 साल के पूर्व विधायक ने दान की अपनी बचत, पीएम मोदी ने जताया ऐसे आभार

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का प्रकोप भारत में बढ़ता ही जा रहा है। हमारा देश कोरोना के खिलाफ ये जंग जीत जाए इसलिए देश का हर नागरिक योगदान दे रहा हैं। डाक्टर, नर्स और अस्‍तताल के कर्मचारी जहां कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात लगे हुए हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए कोरोना के खिलाफ लड़े जा रहे युद्ध में कोई आर्थिक कमी न हो इसके लिए पीएम राहत कोष के लिए देश की मशहूर हस्तियों से लेकर हर नागरिक अपनी क्षमता के अनुसार धनराशि दान कर रहे हैं।

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अब इसी क्रम में 99 साल के पूर्व विधायक रत्नभाई ठुम्मर ने अपनी बचत के रुपये इस मद में दान किए हैं। जिसके बाद पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अपनी बचत दान करने वाले 99 साल के पूर्व विधायक रत्नभाई ठुम्मर को फोन कर उनके इस प्रयास की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने करीब तीन मिनट तक उनसे फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने पुराने दिनों की याद दिलाई और कहा कि एक बार जूनागढ़ जिले के बिल्खा शहर में ठुम्मर से मिलने आए थे। गुजरात सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक पीएम मोदी ने ठुम्मर से कहा, 'मैंने आपको बचत दान करने की वजह से फोन किया है। आप इस उम्र में भी अच्छा काम कर रहे हैं। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिएगा।'
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प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें वह मुलाकात याद है, तो ठुम्मर ने हां में जवाब दिया। बता दें 90 वर्षीय पूर्व विधायक ठुम्मर अब ठीक से सुन नहीं सकते हैं। उनके रिश्तेदार ने बताया कि 99 वर्षीय ठुम्मर ने पीएम मोदी से कहा है कि वह अपनी पूरी ताकत के साथ इस वायरस से लड़ें।
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उनके परिजनों ने बताया कि ठुम्मर अक्सर बताते हैं कि मोदी एक बार उनके निवास पर मिलने आए थे। उनके साथ गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला भी थे। रिश्तेदारों ने बताया कि ठुम्मर ने पीएम मोदी को बताया कि इस वायरस से लड़ने के लिए वह अपनी सारी बचत दान करने के लिए तैयार हैं। बीते 17 अप्रैल को वह जूनागढ़ जिला कलेक्टर के कार्यालय गए और उन्होंने राज्य सरकार को 51 हजार रुपये का चेक सौंपा था1 डीएम को चेक सौंपते हुए उन्‍होंने कहा था कि 'मैंने इसलिए सरकार को दान देने का फैसला किया है क्योंकि इस उम्र में मैं शरीर से मदद नहीं कर सकता।' बता दें रत्नभाई ठुम्मर 1975 से 1980 के बीच जूनागढ़ में मेंदारा मानिया सीट से विधायक थे।खबरों के अनुसार विधायक रहते हुए उन्होंने कभी भी वेतन नहीं लिया। यहां तक कि पूर्व विधायक होने के नाते वह पेंशन भी नहीं लेते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आहृवान के बाद प्रत्येक सोमवार को खाना नहीं खाने का भी प्रण लिया था, जिसका पालन वह आज तक कर रहे हैं।
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