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86 Naxali Surrender: अमित शाह के बस्तर दौरे के बीच, तेलंगाना में 86 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

86 Naxali Surrender: अमित शाह के नक्सलियों के गढ़ बस्तर दौरे के बीच छत्तीसगढ़ से सटे तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम ज़िले में शनिवार को प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के कुल 86 सदस्यों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

इन 86 माओवादियों में चार एरिया कमेटी मेंबर (ACMs) भी शामिल हैं, जिन्होंने नक्सलवाद की हिंसात्मक राह छोड़कर अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन अपनाने का फैसला किया। उन्होंने मल्टी जोन-1 के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) एस चंद्रशेखर रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण किया, यह जानकारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में दी गई।

86 Naxali Surrender

इनामी नक्सलियों ने किया आत्म समर्पण

भद्राद्री कोठागुडेम के पुलिस अधीक्षक बी रोहित राजू ने पीटीआई को बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले चार एरिया कमेटी मेंबर (ACMs) पर प्रत्येक पर चार लाख रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस के अनुसार, माओवादी अब आत्मसमर्पण कर रहे हैं क्योंकि वे देख रहे हैं कि पूर्व उग्रवादियों को सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है और 'ऑपरेशन चेयुथा' कार्यक्रम के तहत आदिवासी समुदायों के लिए विकास और कल्याण योजनाएं चलाई जा रही हैं।

ये भी पढ़ें Naxal Surrendered: बीजापुर में 50 नक्सलियों ने किया सरेंडर,14 पर था लाखों का ईनाम, अमित शाह ने दोहराया संकल्प

इस साल 224 नक्सलियों ने किया समर्पण

इस साल अब तक कुल 224 माओवादी विभिन्न स्तरों पर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। पुलिस का कहना है कि इन उग्रवादियों ने यह समझ लिया है कि प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) अब एक पुरानी विचारधारा पर काम कर रही है और उसे आदिवासी जनता का समर्थन और विश्वास नहीं रहा है।

अगले चैत्र नवरात्र तक नक्सल मुक्त होगा छत्तीसगढ़

वहीं आज गृह मंत्री अमित शाह नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले बस्तर के दौरे पर गए थे इस दौरान उन्होंने नक्सलियों को आत्म समर्पण कर मुख्यधारा में वापस लौट जाने की अपील की थी।

उन्होंने ये भी कहा था कि,'आज चैत्र नवरात्रि की अष्टमी है। मैं अभी-अभी माँ दंतेश्वरी का आशीर्वाद लेकर आया हूँ कि अगली चैत्र नवरात्रि से पहले संपूर्ण छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो जाए और हमारा बस्तर खुशहाल हो जाए'

'जब बस्तर के लोग तय करें कि...'

वहीं उन्होंने कहा कि, बस्तर में शांति तभी हो सकती है, जब बच्चे स्कूल में जाएं, माताओं के स्वास्थ्य की चिंता हो, आदिवासी युवा कुपोषण से पीड़ित ना हो और उसकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था हो, हर गाँव में एक दवाखाना हो, हर तहसील में अस्पताल हो, हर घर में 7 किलो चावल मुफ्त पहुंचता हो, सभी के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य का बीमा हो। यह तभी हो सकता है जब बस्तर के लोग तय करें कि, यहाँ का हर गांव नक्सलमुक्त बनेगा।

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