65 साल के बुजुर्ग की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, बेटी और नातिन को काबुल जेल से रिहा कराए सरकार
नई दिल्ली, 2 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट में एक बुजुर्ग पिता ने गुहार लगाई है कि वह केंद्र सरकार को फौरन निर्देश दे कि कथित रूप से काबुल जेल में बंद उसकी बेटी और नातिन को केंद्र सरकार रिहा करा कर भारत लाए। यह याचिका 65 वर्षीय वीजे सेबेस्टियन की ओर से दायर कई गई है, जिसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की अपील गई गई है कि वह प्रत्यर्पण और उनकी स्वदेश वापसी के लिए जरूरी कदम उठाए। सेबेस्टियन की शिकायत है कि उनकी बेटे आयशा और नातिन सारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पुल-ए-चरखी जेल में बंद है।

'बेटी और नातिन को काबुल जेल से रिहा कराए सरकार'
65 साल साल के वीजे सेबेस्टियन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उनकी बेटी सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा और उनकी नातिन 7 साल की सारा इस समय अफगानिस्तान के पुल-ए-चरखी जेल में कैद हैं। वह चाहते हैं कि अदालत इस मामले में केंद्र सरकार को उनके प्रत्यर्पण और दोनों मां-बेटी को स्वदेश वापस लाने के लिए निर्देश जारी करे। याचिका में कहा गया है कि उनके प्रत्यर्पण के लिए कदम नहीं उठाया जाना गैर-कानूनी और असंवैधानिक है; और भारतीय संविधान के आर्टिकल 14,19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
राजनयिक पहल करने की भी मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को यह भी निर्देश देने की गुजारिश की गई है कि वह उन्हें राजनियक सुरक्षा देने और बंदियों को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान में स्थित अपने काउंसलर/ राजनयिक दफ्तर के जरिए काउंसलर सहायता मुहैया करवाए। सेबेस्टियन ने यह याचिका अपने वकील रंजीत बी मरार और लक्ष्मी के कैमल के जरिए दाखिल की है।
गौरतलब है कि अफगानिस्तान में इस समय तालिबान के बढ़ते प्रभाव से भारत ने अपने काउंसलर ऑफिस में भी कर्मचारियों की संख्या सीमित कर रखी है। यही नहीं, अफगानिस्तान में रह रहे भारतीयों को अपनी सुरक्षा के प्रति हमेशा सजग रहने की भी सलाह दी गई है। क्योंकि, अमेरिकी और नाटो सेना की इस महीने के आखिरी तक वहां से हो रही संपूर्ण वापसी के मद्देजर तालिबान आक्रमक हो गया है और अफगानी सेना के साथ उसकी जबर्दस्त जंग छिड़ी हुई है।












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