क्या कश्मीर पर बोलने की वजह से पाक को है अनुपम से समस्या?
नई दिल्ली। मंगलवार को खबर आई कि पाकिस्तान ने बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर को कराची में होने वाले लिट्रेचर फेस्टिवल में शिरकत करने के लिए जरूरी वीजा देने से साफ इंकार कर दिया।
दूसरी बार है जब पाकिस्तान के हाई कमीशन ने अनुपम खेर को वीजा देने से इंकार कर दिया है। वजह बताई गई है कि वीजा के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन को कोई भी चिट्ठी नहीं मिली है। अनुपम ने फैसले के दुर्भाग्यपूण बताया है।
इससे पहले मई 2015 में अनुपम खेर को लाहौर में होने वाले एक कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन उस समय पाक हाई कमीशन की ओर से जवाब दिया गया था कि अनुपम की सुरक्षा के चलते यह फैसला लिया गया है।
अनुपम खेर ने दिसंबर 2014 में पेशावर में हुए आतंकी हमले के बाद एक ओपेन लेटर लिखकर इस आतंकी हमले की निंदा की थी।अनुपम पिछले कुछ समय से सुर्खियों में है और अगर चर्चा यहां हो रही है तो फिर उसका जिक्र बॉर्डर के उस तरफ होना भी लाजिमी है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि अनुपम के खबरों में रहने की एक वजह है कश्मीर और कश्मीरी पंडितों का मुद्दा जोर-शोर से उठाना। अनुपम बतौर एक्टिविस्ट इस मसले पर काफी सक्रियता से काम कर रहे हैं।
एक नजर डालिए उन पांच वजहों से जिसका जिक्र अनुपम की ओर से करने पर पाक को शायद मिर्ची लग गई है।

अनुपम बन गए हैं कश्मीरी पंडितों की आवाज
अनुपम पिछले कुछ समय से उन हजारों विस्थापित कश्मीरी पंडितों की आवाज बन गए हैं, जिन्होंने 90 के दशक में वह दर्द झेला है जिसकी याद करके आज भी आंखे नम हो जाती हैं। पाक जिस पर हमेशा से आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है वहां मौजूद कुछ लोग कतई नहीं चाहेंगे कि ऐसे किसी भी शख्स को पाक आने दिया जाए जो कश्मीर की बात करता है।

अनुपम ने किया था विरोध
नवंबर 2015 में जब जम्मू कश्मीर में हुई एक मुठभेड़ में इंडियन आर्मी के लेफ्टिनेंट कर्नल संतोष महादिक शहादत को हासिल हुए थे तब उसके बाद अनुपम का एक बयान आया था। यह बयान पाक के साथ क्रिकेट संबंधों को बहाल करने से जुड़ा था। अनुपम ने साफ इंकार कर दिया था कि जब तक सीमा के उस पार से हालात नहीं सुधरते हैं, तब तक दोनों देशों के बीच क्रिकेट कतई नहीं होना चाहिए।

आतंकी ताकतों का पुरजोर विरोध
जिस पाक हाइ कमीशन में अनुपम के वीजा की चिट्ठी भेजी जानी थी, वहां पर इस समय बतौर हाई कमिश्नर अब्दुल बासित कामकाज देख रहे हैं। यह वहीं बासित हैं जिन्होंने सितंबर 2014 में बयान दिया था कि आतंकी हाफिज सईद पाक में कहीं भी आजाद घूम सकता है। अब सोचिए ऐसे में पाक हाइकमीशन को आतंक के खिलाफ आवाज मुखर करने वाला कोई भी शख्स कैसे बर्दाश्त हो सकता है।

करीबियां पाक में कुछ लोगों को चुभती
यह एक हकीकत है कि पाक में बैठे कुछ लोग पीएम मोदी को पसंद नहीं करते हैं। पाक सेना के कुछ रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर और सुरक्षा मामलों से जुड़े जानकारी पीएम मोदी के लिए जिस भाषा का प्रयोग भारतीय न्यूज चैनलों पर आकर करते हैं, वह यह बताने के लिए काफी है।

बयानों में आई विविधता
नवंबर 2015 में अनुपम ने जहां कहा कि क्रिकेट और डिप्लोमैसी दोनों अलग-अलग चीजें हैं तो इससे पहले अपने एक बयान में उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के लोगों की सोच रिश्तों पर एक जैसी ही है। दोनों देशों के लोग आपस में प्यार और भाईचारा चाहते हैं। शायद पाकिस्तान हाईकमीशन उनके इस बयान से कुछ ज्यादा ही कंफ्यूज हो गया था।












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