कश्मीर हमले से साबित, आतंकियों को इंतजार एक और जूएनयू प्रकरण का
श्रीनगर। जिस बात का डर था आखिर वही हुआ। नौ फरवरी को जो चिंगारी राजधानी दिल्ली स्थित जेएनयू विश्वविद्यालय में भड़की थी वह शोला बन गई और उसकी तपन श्रीनगर तक पहुंच गई है।
19 फरवरी को आईएसआईएस और पाकिस्तान के झंडे के साथ जेएनयू को थैंक्यू बोलकर भारत के खिलाफ नारे लगाए गए। 20 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला।
एक कैप्टन और सीआरपीएफ के दो जवान शहीद। देश के अंदर जो हालात बने हैं, वह अब देश की सुरक्षा के लिए बड़े खतरे में तब्दील होते जा रहे हैं।
सीआरपीएफ काफिले पर हुआ हमला पिछले वर्ष उधमपुर हमले की ही तरह था। हमले में स्पेशल कमांडो फोर्स के कैप्टन समेत सीआरपीएफ
जवान शहीद हो गए। पंपोर के पास आतंकियों ने शनिवार को काफिले पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी और फिर एक बिल्डिंग में छिप गए।
आतंकियों के लिए चाहे जेएनयू हो या फिर अफजल गुरु की फांसी, हालातों ने हमेशा आग में घी का काम किया है। एक नजर डालिए कि आखिर क्यों जेएनयू जैसे विवाद को शुरुआत में रुकना होगा।

ताक में बैठा है दुश्मन
पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन और आईएसआई इस समय किसी बड़े मौके की तलाश में हैं। वह भारत में बड़ी तादाद में आतंकियों की घुसपैठ को अंजाम देने की कोशिशों में हैं। ऐसे में ये हालात उनकी मदद कर सकते हैं।

शनिवार का हमला सुबूत
पिछले 10-12 दिनों में जो कुछ भी हुआ है वह छिपा नहीं है। लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुखऔर मोस्ट वांटेड आतंकी इन दिनों में घाटी में अपने छिपें हुए आतंकियों के जरिए सक्रिय है। उसे पिछले दिनों पीओके में भी देखा गया है। वह हमेशा से एक बड़े आतंकी हमले की धमकी देता आया है। कहीं ऐसा न हो कि हम जेएनयू विवाद पर चर्चा करते रहें और फिर एक मुंबई हमला हो जाए।

बड़ी चुनौती
अगर आपको याद हो तो पिछले दिनों आईएसआईएस के एक बड़े आतंकी ने धमकी दी थी कि जल्द ही कश्मीर से एक अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। अगर पाकिस्तान के आतंकी भारत की स्थिति पर नजर रखें हुए हैं तो फिर आईएसआईएस जो कि अफगानिस्तान और बांग्लादेश तक आ गया, उसे भारत में बड़ी साजिश को अंजाम देने में देर नहीं लगेगी।

नक्सलियों की भी नजरें
देश के अंदर मौजूद नक्सली संगठन, जिन्हें पाक एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठनों का समर्थन मिलने लगा है, वे भी एक बड़े हमले के जरिए तनाव को बढ़ा सकते हैं।

देश के खिलाफ देश में ही बना माहौल
जहां कश्मीर घाटी में पिछले एक वर्ष से माहौल बिगड़ा है तो वहीं जेएनयू और जाधवपुर जैसी घटनाएं देश के अंदर ही देश के खिलाफ माहौल को कमजोर करने में लगी हुई हैं। यह हालात देश की सुरक्षा कमजोर करते हैं।












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