'जनता का विश्वास कम हो रहा, हम दबाव में हैं', 21 पूर्व जजों ने चीफ जस्टिस से जो कहा, वो आपको भी पढ़ना चाहिए
DY Chandrachud News: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 21 पूर्व जजों ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने देश के मौजूदा हालात में न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव की बात की है। उन्होंने ये भी कहा है कि न्यायिक प्रणाली में अब जनता का विश्वास कम हो रहा है।

इस चिट्ठी को लिखने वालों में 17 हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं और बाकी सुप्रीम कोर्ट के जज हैं। इन सभी जजों ने 14 अप्रैल को एक सामूहिक पत्र में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से जो कुछ भी कहा है, वो देश के हर जागरूक नागरिक को पढ़ना चाहिए।
21 Retired Judges write to Chief Justice of India (CJI) Dy Chandrachud
— ANI (@ANI) April 15, 2024
"We write to express our shared concern regarding the escalating attempts by certain factions to undermine the judiciary through calculated pressure, misinformation, and public disparagement. It has come to… pic.twitter.com/bPZ0deczI2
पूर्व 21 जजों ने लिखा है, ''कुछ गुटों द्वारा सोचे-समझे दबाव, गलत सूचना और सार्वजनिक अपमान के माध्यम से न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। जिसको लेकर हम चिंतित हैं। यह हमारे संज्ञान में आया है कि संकीर्ण राजनीतिक हितों और व्यक्तिगत लाभ से प्रेरित ये तत्व कोशिश कर रहे हैं कि हमारी न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास कम हो जाए।''

पूर्व 21 जज बोले- ये हमारे देश के लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं
पूर्व 21 जजों ने पत्र में आगे लिखा, "हम खासतौर से गलत सूचना की रणनीति और न्यायपालिका के खिलाफ जनता की भावनाओं को भड़काने के बारे में चिंतित हैं, जो न केवल अनैतिक हैं, बल्कि हमारे लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के लिए हानिकारक भी हैं।''
21 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने पत्र में आगे कहा, ''किसी के विचारों से मेल खाने वाले न्यायिक निर्णयों की चयनात्मक रूप से प्रशंसा करने और उन फैसलों की तीखी आलोचना करने की प्रथा जो न्यायिक समीक्षा और कानून के शासन के सार को कमजोर नहीं करते हैं।''
आखिर 21 जजों ने चीफ जस्टिस को क्यों लिखी ये चिट्ठी
सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों सहित सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने उन घटनाओं का पत्र में जिक्र नहीं किया है, जिसकी वजह से उन्होंने सीजेआई को पत्र लिखा है। गौरतलब है कि यह पत्र भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच जारी बहसबाजी के दौरान की गई है।












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