'सुपर साल' बना 2024! दुनिया भर में सरकारों को क्यों विरोध का सामना करना पड़ा? नरेंद्र मोदी अपवाद क्यों?
Narendra Modi Exception: 2024 का साल सरकारों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। पूरी दुनिया में, चाहे सरकार वामपंथी हो या दक्षिणपंथी, उन्हें जनता के असंतोष और विरोध का सामना करना पड़ा। आर्थिक समस्याओं और महामारी के प्रभावों ने कई देशों में सरकारों की स्थिति को कमजोर किया है। लेकिन, इन हालातों में भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अपवाद बनी हुई है।
दुनिया भर में चुनावों को लेकर 2024 को 'सुपर साल' कहा जा रहा है। लगभग 70 देशों में चुनाव हुए, जो विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन इन चुनावों में एक खास पैटर्न दिखा - मतदाताओं का अपनी सरकारों के प्रति गुस्सा।

क्या है असंतोष के प्रमुख कारण?
- कोविड-19 महामारी का प्रभाव: महामारी के बाद भी लोग और व्यवसाय आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
- मुद्रास्फीति और महंगाई: ऊंची कीमतों ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
- सरकारों से संपर्क टूटना: प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, लोग राजनीतिक नेतृत्व को जनता से कटा हुआ मान रहे हैं।
पश्चिमी लोकतंत्रों पर संकट
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स के अनुसार, महामारी के बाद से 54 में से 40 देशों में सत्ताधारी नेता चुनाव हार चुके हैं। कुछ अहम उदाहरण...
- ब्रिटेन: यहां कंजर्वेटिव पार्टी को 1832 के बाद सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा।
- फ्रांस: दक्षिणपंथी पार्टियों का उभार हुआ, जिससे सरकार कमजोर हुई और संसद विभाजित हो गई।
- जर्मनी: यूरोपीय संसद चुनावों में मौजूदा सरकारों को झटके लगे।
एशिया में सत्ताधारी दलों की चुनौतियां
- दक्षिण कोरिया: यहां विपक्षी दल ने चुनावों में बड़ी जीत हासिल की।
- जापान: लंबे समय से सत्ता में रही लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को जनता ने कड़ी फटकार दी।
- भारत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को जून में झटका लगा। हालांकि, बीजेपी ने सहयोगियों की मदद से सत्ता बचा ली।
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में क्या हुआ?
अफ्रीका
- लोकतांत्रिक देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका और सेनेगल में सत्ता विरोधी भावना उभरी।
- बोत्सवाना में 58 साल पुरानी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।
- हालांकि, रवांडा जैसे सत्तावादी देशों में सरकारें मजबूत बनी रहीं।
लैटिन अमेरिका:
- मेक्सिको ने एक अलग तस्वीर पेश की। राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर के उत्तराधिकारी क्लाउडिया शिनबाम ने बड़ी जीत दर्ज की। यहां की जनता सरकार की आर्थिक नीतियों से संतुष्ट नजर आई।
भारत और नरेंद्र मोदी: अपवाद क्यों?
दुनिया भर में विरोध और सत्ता परिवर्तन के बीच नरेंद्र मोदी की सरकार को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ। हालांकि, बीजेपी को बहुमत गंवाना पड़ा, लेकिन सहयोगी दलों की मदद से सरकार ने स्थिरता बनाए रखी।
क्या मोदी सरकार को फायदा पहुंचा?
- मजबूत नेतृत्व: मोदी सरकार ने महामारी के बाद कई आर्थिक सुधार किए।
- लोकप्रिय योजनाएं: उज्ज्वला योजना, जन धन योजना जैसी योजनाओं ने जनता के बीच सकारात्मक प्रभाव डाला।
- स्थिरता का वादा: विरोध के बावजूद, मोदी सरकार ने खुद को एक स्थिर विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।
2024 में दुनिया भर में सरकारों को क्यों विरोध का सामना करना पड़ा?
2024 में महामारी के प्रभाव, महंगाई, और आर्थिक कठिनाइयों के कारण दुनिया भर में सरकारों के प्रति असंतोष बढ़ा। कई देशों में मतदाताओं ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बदलाव की मांग की।
भारत में नरेंद्र मोदी सरकार अपवाद क्यों रही?
नरेंद्र मोदी सरकार ने मजबूत नेतृत्व और जनहित की योजनाओं के जरिए जनता का विश्वास बनाए रखा। सहयोगी दलों के समर्थन से बीजेपी ने सत्ता में स्थिरता बनाए रखी।
2024 का साल सरकारों के लिए बेहद कठिन रहा। मतदाता आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को लेकर ज्यादा मुखर हुए। जहां पश्चिमी लोकतंत्रों और एशियाई देशों में सरकारों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा, वहीं नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की स्थिति को बनाए रखा। भारत में बीजेपी के लिए यह साल भले ही चुनौतीपूर्ण रहा हो, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने दिखा दिया कि उनकी सरकार जनता के बीच एक भरोसेमंद विकल्प बनी हुई है।
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