2008 Aarushi Hemraj murder case: वो 5 वजहें जिनके आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि के माता-पिता को किया बरी

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Aarushi Hemraj case: वो 5 वजहें जिनके आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया तलवार दंपत्ति को बरी

नई दिल्ली। साल 2008 में हुए नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में आरुषि के माता-पिता को बरी करने का आदेश सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद गाजियाबाद की डासना जेल में बंद तलवार दंपत्ति को रिहाई मिल जाएगी। कोर्ट ने आरुषि के माता-पिता राजेश और नुपूर तलवार की अपील को स्वीकार करते हुए ये फैसला सुनाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई अदालत के फैसले को पलटते हुए तलवार दंपत्ति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 2008 के आरुषि हेमराज मर्डर केस में तलवार दंपत्ति राजेश और नुपूर तलवार को बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने तलवार दंपत्ति की उम्रकैद की सजा भी रद्द कर दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि के माता-पिता को किया बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये फैसला आरुषि के माता-पिता को बड़ी राहत देने वाला है। डासना जेल में बंद तलवार दंपत्ति को जल्द ही जेल से रिहाई मिल जाएगी। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने जिन वजहों को आधार बनाकर तलवार दंपत्ति को बरी करने का फैसला सुनाया, एक नजर उन बातों पर...

1- सबूतों के अभाव में कोर्ट ने सुनाया फैसला

1- सबूतों के अभाव में कोर्ट ने सुनाया फैसला

2008 के आरुषि हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव को ध्यान में रखते हुए नुपूर और राजेश तलवार को राहत दी है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि तलवार दंपत्ति को दोषी करार देने में सबूत काफी नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उन्हें बरी किया गया है। जो भी सबूत सीबीआई की ओर से पेश किए गए वो पूरे नहीं हैं।

पूरे मामले की जांच में कई खामियां

पूरे मामले की जांच में कई खामियां

नोएडा के जलवायु विहार में हुई आरुषि की हत्या में कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को बरी करने का आदेश दिया है। सीबीआई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कोर्ट ने ये आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जांच में कई खामियां हैं। कोर्ट ने कहा कि जिस समय आरुषि और हेमराज की हत्या हुई घर में चार सदस्य थे, जिनमें दो लोगों की हत्या होती है तो ये कैसे कहा जा सकता है कि घर में बचे दो सदस्यों ने ही उनकी हत्या की होगी। इस बात के कोई सबूत साफ तौर से नहीं आए हैं।

संदेह का लाभ मिलना चाहिए

संदेह का लाभ मिलना चाहिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अगर सबूत पूरे नहीं हैं, ऐसे में संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। आरुषि मर्डर केस में जिस तरह से उनके माता-पिता को दोषी करार देते हुए निचली अदालत ने कहा था कि उन्हें संदेह का लाभ नहीं दिया जा सकता, इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिरे से नकार दिया। कोर्ट ने कहा कि संदेह का लाभ मिलना चाहिए। पूरे मामले की जांच में जो सबूत मिले हैं वो अधूरे हैं।

जांच में कई कमियां रहीं

जांच में कई कमियां रहीं

आरुषि केस में निचली अदालत में बताया गया था कि जिस फ्लैट में आरुषि की हत्या हुई वो अंदर से बंद था। ऐसे में उस फ्लैट में कोई बाहरी नहीं आ सकता है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हम इस बात को नहीं मान सकते कि घर अंदर से बंद हो तो कोई बाहर से नहीं आ सकता है। हम इस बात को नहीं मान सकते हैं। परिस्थितिजन्य सबूत के चलते उन्हें राहत दी गई है। पूरे मामले की जांच में कई कमियां हैं, तलवार दंपत्ति को दोषी करार दिए जाने के लिए सबूत पूरे नहीं।

कोई और कातिल हो सकता है, इससे इंकार नहीं

कोई और कातिल हो सकता है, इससे इंकार नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिस्थितिजन्य सबूतों के अभाव में आरुषि के माता-पिता को ये राहत दी है। उनकी उम्रकैद की सजा भी रद्द कर दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि आरुषि-हेमराज का कत्ल कोई जरूरी नहीं कि घर में मौजूद सदस्य ने ही किया हो। कोर्ट ने कहा कि सबूतों के अभाव में कहा जा सकता है कि हत्या कोई और भी कर सकता है। ऐसे में आरुषि के माता-पिता को इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

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English summary
2008 Aarushi Hemraj murder case: Allahabad High Court sets aside CBI court order, acquits Rajesh and Nupur Talwar.
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