दिल्ली पुलिस के 12 कांस्टेबल नौकरी से बर्खास्त, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए पाई थी नौकरी
नई दिल्ली,14 नवंबर: राजधानी की पुलिस ने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए नौकरी पाने वाले 12 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। ये फैसला डिपार्टमेंटल इंक्वॉयरी के बाद लिया गया। हैरानी की बात ये है कि ये सभी पुलिसकर्मी 2007 में भर्ती हुए थे, ऐसे में इनके दस्तावेजों की जांच करने में विभाग को 14 साल का वक्त लग गया। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कई अन्य पुलिसकर्मियों पर भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि उनके भी ड्राइविंग लाइसेंस की जांच चल रही है।

जानकारी के मुताबिक 2007 में दिल्ली पुलिस ने ड्राइवर्स के पद पर भर्ती निकाली थी। जिसका बकायदा न्यूज पेपर्स में विज्ञापन भी निकलवाया गया। बाद में व्यवस्थित ढंग से 600 से ज्यादा ड्राइवर्स की भर्ती की गई। कुछ सालों तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन 2012 में सुल्तान सिंह नाम के एक शख्स ने कांस्टेबल (ड्राइवर) के पद के लिए आवेदन किया। उसने अपने दस्तावेजों में मथुरा का ड्राइविंग लाइसेंस लगा रखा था। जब दिल्ली पुलिस ने दस्तावेजों की जांच की तो मथुरा RTO में उसका रिकॉर्ड ही नहीं मिला।
31 के रिकॉर्ड ही नहीं मिले
सुल्तान सिंह का मामला सामने आने के बाद आधिकारियों को पूरा खेल समझने में देर नहीं लगी। तुरंत 2007 की भर्ती में शामिल 81 उम्मीदवारों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच के आदेश क्राइम ब्रांच को दिए गए। 2019 में पता चला कि दिल्ली पुलिस में शामिल 31 कांस्टेबल के रिकॉर्ड RTO डेटाबेस में हैं ही नहीं। बाद में कंट्रोल रूम, जो मॉडल टाउन थाना क्षेत्र में आता है, उसके 12 कांस्टेबलों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। अब नकली ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक अभी कई कांस्टेबलों के दस्तावेजों की जांच जारी है। अगर उनके भी फर्जी पाए जाते हैं, तो उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया जाएगा।












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