मुश्किल में मोदी सरकार, 10 लाख डॉक्टरों ने किया हड़ताल का ऐलान
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी वर्ष में प्रवेश कर रही है। इसके साथ ही लगातार किसान, छात्र, बेरोजगार, केंद्र सरकार के कर्मचारी आंदोलित हैं। ऐसे में मोदी सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। जानकारी के अनुसार 2 अप्रैल से 10 लाख डॉक्टर हड़ताल पर जाने वाले हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और मेडिकल स्टूडेंट्स ने सरकार के नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का विरोध किया है। इस बिल के खिलाफ तमाम डॉक्टर हड़ताल पर जाने वाले हैं।

महापंचायत में हुआ फैसला
जानकारी के अनुसार दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महापंचायत में इस बड़ी हड़ताल का फैसला लिया गया है। आईएमए लगातार इस एनएमसी बिल का विरोध कर रहा है। दरअसल इस बिल में यह प्रावधान है कि अगर यह पास हो गया तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह एक नए ढांचे का निर्माण किया जाएगा। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे उनके पेशे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

अलोकतांत्रिक फैसला
डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांग बहुत ही साधारण है, लिहाजा अगर इन मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो हम हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं। आईएमए के अध्यक्ष रवि का कहना है कि सरकार से हमारी मांग बेहद साधारण है, हम चाहते हैं कि देश की स्वास्थ्य नीति पर फैसला लेने के समय हमे उसमे शामिल किया जाए। लेकिन हमे इसमे शामिल किए बगैर नेशनल कमीशन बिल लाने की तैयारी की जा रही है। यह बिल अलोकतांत्रिक, संघ विरोधी और छात्र विरोधी है।

सरकार मांगों पर ध्यान नहीं दे रही
आईएमए के अध्यक्ष ने कहा कि यह बिल मूल रूप से अमीर लोगों को आरक्षण देने का काम करेगा। डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है और इसपर ध्यान नहीं दे रही है। एक डॉक्टर का कहना है कि तीन साल से यह सरकार हमारी बात को तवज्जो नहीं दे रही है, सरकार हमपर लगातार दबाव बना रही है। गौरतलब है कि सरकार ने नए बिल में आयुष डॉक्टरों के लिए एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव रखा है जोकि शार्ट टर्म कोर्स है जिसके बाद वह भी कुछ हद तक एलोपैथिक दवाइयां मरीजों को दे सकेंगे।
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