सुरक्षा चिंताएं: भारत ने कंधार से राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुलाया
नई दिल्ली, 12 जुलाई। समाचार एजेंसी एएफपी ने भारतीय रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से कहा कि नई दिल्ली ने कंधार में वाणिज्य दूतावास से अपने राजनयिक और सुरक्षा कर्मचारियों को अस्थायी रूप से हटा लिया है. रिपोर्टों के मुताबिक दक्षिणी अफगानिस्तानमें जारी हिंसा के चलते करीब 50 भारतीय राजनयिकों और सुरक्षा कर्मियों को वापस भारत बुला लिया गया है.

भारत: वाणिज्य दूतावास बंद नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कंधार में कान्स्युलेट के बंद करने के सवाल पर कहा, "भारत अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति की करीब से निगरानी कर रहा है. हमारे कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि है. कंधार में भारत के महावाणिज्य दूतावास को बंद नहीं किया गया है. हालांकि, कंधार शहर के पास भीषण लड़ाई के कारण भारत के सभी कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वापस लाया गया है. मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि स्थिति स्थिर होने तक यह पूरी तरह से अस्थायी उपाय है. फिलहाल, वाणिज्य दूतावास हमारे स्थानीय कर्मचारी के माध्यम से काम करना जारी रखेगा."
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सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत ने कंधार वाणिज्य दूतावास में तैनात छह राजनयिकों के साथ 50 भारतीय अधिकारियों को वापस बुला लिया है.
इस बीच तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी इस सप्ताह मुलाकात करने वाले हैं. दोनों नेता अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा कर सकते हैं.
जयशंकर ने इससे पहले रूस और ईरान की यात्रा की थी, जहां उन्होंने अपने समकक्षों के साथ अफगानिस्तान के मुद्दे पर बातचीत की थी. भारत ने अफगानिस्तान में करीब तीन अरब डॉलर का निवेश बतौर सहायता और पुननिर्माण कार्यों में किया हुआ है. भारत अफगानिस्तान में राष्ट्रीय शांति प्रक्रिया का समर्थन कर रहा है.
अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी से अशांत देश में आतंकवादी अभियान तेज होने के साथ ही अफगान तालिबान ने इस सप्ताह दावा किया कि उनके लड़ाकों ने देश के 85 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है.
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अफगान तालिबान ने कंधार प्रांत की राजधानी कंधार में सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच भयंकर झड़पें हुईं. कंधार वह जगह है जहां तालिबान ने अपना आंदोलन शुरू किया था.
तालिबान के हमले तेज
रूस और तुर्की ने भी पिछले सप्ताह सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मजार-ए-शरीफ से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला लिया था. मॉस्को का कहना है कि उसने उत्तरी अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में अपने राजनयिक अभियानों को स्थगित कर दिया है.
चीन ने भी 2 जून को अफगानिस्तान से अपने 210 नागरिकों को वापस बुला लिया. तालिबान और अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा हिंसा के कारण अफगानिस्तान में विदेशी अपने गृह देश लौट रहे हैं. तालिबान लड़ाकों ने कई सीमा क्रॉसिंग पर कब्जा जमा लिया है और कई प्रांतीय राजधानियों पर आक्रमण करने का प्रयास किया है.
90 प्रतिशत अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं और और बाकी सैनिक 31 अगस्त तक वापस अमेरिका चले जाएंगे. इस बीच, ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री पीटर डटन ने पुष्टि की है कि अफगानिस्तान में उनके देश का 20 साल का सैन्य मिशन खत्म हो गया है.
रिपोर्टः आमिर अंसारी (एएफपी, रॉयटर्स)
Source: DW
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