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भारत में ई-कॉमर्स वेबसाइट और संस्थापकों को सौ अरब जुर्माने का नोटिस

नई दिल्ली, 05 अगस्त। रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट में तीन सूत्रों एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि वॉलमार्ट की फ्लिपकार्ट और इसके संस्थापकों को नोटिस भेजकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूछा है कि क्यों ना कंपनी पर सौ अरब रुपये का जुर्माना लगा दिया जाए. यह मामला विदेशी निवेश संबंधित कानूनों के उल्लंघन का है.

Provided by Deutsche Welle

ईडी कई साल से फ्लिपकार्ट और एमेजॉन द्वारा विदेशी निवेश के नियमों के उल्लंघन के मामले की जांच कर रहा है. नाम न छापने की शर्त पर ईडी के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि फ्लिपकार्ट और संबद्ध पक्ष डबल्यूएस रीटेल ने विदेशी निवेश हासिल किया और फिर अपनी वेबसाइट पर उत्पाद बेचे, जिसकी भारतीय कानून इजाजत नहीं देता. इस बारे में भेजे गए सवालों का ईडी ने फिलहाल जवाब नहीं दिया है.

जुलाई में भेजा गया नोटिस

इस मामले से परिचित तीन और सूत्रों ने बताया कि इस बारे में ईडी ने एक कथित कारण बताओ नोटिस बीती जुलाई में जारी किया था जो चेन्नै स्थित फ्लिपकार्ट के दफ्तर और इसके संस्थापकों सचिन बंसल और बिनी बंसल को भेजा गया था. इस नोटिस में मौजूदा निवेशक टाइगर ग्लोबल का भी नाम था.

तस्वीरों मेंः भारत में डिजिटल मीडिया के नियम

इस बारे में सवाल पूछे जाने पर फ्लिपकार्ट के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी भारत के सारे नियम-कानूनों का पालन कर रही है. प्रवक्ता ने कहा, "हम अधिकारियों से पूरा सहयोग करेंगे जो नोटिस के मुताबिक 2009-2015 के दौरान के मामले को देख रहे हैं."

ईडी अपनी जांच के दौरान इस तरह के नोटिस सार्वजनिक नहीं करता है. एक सूत्र ने कहा कि फ्लिपकार्ट और अन्य के पास इस नोटिस का जवाब देने के लिए 90 दिन का समय है. डब्ल्यूएस रीटेल 2015 में ही भारत से अपना कामकाज समेट चुकी है. टाइगर ग्लोबल ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. सचिन और बिनी बंसल ने भी अभी इस बारे में टिप्पणी नहीं की है.

छोटे विक्रेता नाराज हैं

2018 वॉलमार्ट ने 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट में मुख्य हिस्सेदारी खरीदी थी, जो अमेरिकी कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा सौदा था.

फ्लिकार्ट पहले भी कई मुश्किलों से गुजर रही है. कंपनी के खिलाफ कई मामलों में जांच चल रही है और छोटे विक्रेताओं ने भी बड़ी संख्या में शिकायतें की हैं.

भारत के छोटे विक्रेताओं का कहना है कि एमेजॉन और फ्लिपकार्ट अपने यहां चुनिंदा विक्रेताओं को प्राथमिकता देते हैं और विदेशी निवेश संबंधी कानूनों से बचने के लिए जटिल ढांचे का प्रयोग करते हैं, जिससे छोटे निवेशकों को नुकसान होता है. दोनों ही कंपनियां इन आरोपों को गलत बताती हैं.

भारत में ऑनलाइन रीटेल

भारत में बिजनस टु बिजनस ईकॉमर्स में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की इजाजत है. भारतीय बाजार में ऑनलाइन रीटेल का दायरा लगातार बढ़ रहा है. इंडिया ब्रैंड इक्विटी फाउंडेशन के मुताबिक 2020 की आखिरी तिमाही में ई-कॉमर्स का आकार 36 प्रतिशत बढ़ा, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा ब्यूटी-वेलनेस से जुड़े उत्पादों का था.

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फाउंडेशन का अनुमान है कि 2025 तक भारत में ई-कॉमर्स की ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ सकती है. 2024 तक भारत का ई-कॉमर्स मार्किट 99 अरब डॉलर का हो जाने का अनुमान है.

वीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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