गंगा की बाढ़ से भागे, यमुना की बाढ़ में फंस गए

दिल्ली की बारिश

भगवान देवी, उनके पति शिव कुमार और उनके चार बच्चों के लिए अब मकसद बस बाढ़ के बाद बची-खुची जिंदगी समेटना रह गया है. 38 साल की भगवान अपने परिवार के साथ एक बार फिर जिंदगी को शून्य से शुरू करने की कोशिश में जुटी हैं. पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में हुई बारिश के बाद यमुना में आई बाढ़ ने पिछले एक साल में जुटाईं सारी इच्छाओं, आकांक्षाओं और सपनों को बहा दिया.

देवी और उनके परिवार को तब अपनी यमुना किनारे बनी झोपड़ी छोड़कर भागना पड़ा जब पानी घर में घुस आया. यह अचानक हुआ और इन गरीब परिवार के पास अपना सामान बचाने का वक्त नहीं था. अपनी ठोड़ी पर हाथ रखकर देवी बताती हैं, "यहां तक पानी आ गया था."

हजारों अन्य परिवारों की तरह इस परिवारों को भी अपनी झोपड़ी से करीब सौ मीटर दूर फुटपाथ पर शरण लेनी पड़ी. लेकिन यह पहली बार नहीं हुआ है. भगवान देवी और शिवकुमार उत्तर प्रदेश के बदायूं के रहने वाले हैं. बदायूं में उनका घर गंगा से दो किलोमीटर दूर हुआ करता था. वहां लगातार आती बाढ़ ने जीना दूभर कर दिया था. वे बताते हैं कि खराब मौसम के कारण खेती भी नहीं हो पा रही थी, इसलिए 15 साल पहले उन्होंने दिल्ली आने का फैसला किया था.

यह कहानी दक्षिण एशिया के करोड़ों परिवारों की है जो जलवायु परिवर्तन की मार झेलने वाली पहली पंक्ति का हिस्सा हैं. विश्व बैंक की एक रिपोर्ट कहती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक 21 करोड़ से ज्यादा लोगों को अपने ही देश में विस्थापित होना पड़ सकता है. सिर्फ दक्षिण एशिया में चार करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित होने की आशंका है.

जलवायु परिवर्तन हर ओर

क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क इंटरनेशनल के राजनीतिक रणनीति प्रमुख हरजीत सिंह कहते हैं, "जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण एशिया में हालात लगातार खराब हो रहे हैं और भारत के हिमालयी राज्यों में हो रही भारी से बहुत भारी बारिश उस श्रंखला की ही एक कड़ी मात्र हैं."

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वह कहते हैं कि भारत और उसके पड़ोसी देश लगातार बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं झेल रहे हैं. सिंह बताते हैं, "हमने पाकिस्तान में अभूतपूर्व और विनाशकारी बाढ़ देखी. हम नेपाल और पाकिस्तान में हिमखंडों को पिघलते देख रहे हैं. भारत और बांग्लादेश में समुद्र का जलस्तर बढ़ता जा रहा है. चक्रवातीय तूफान और अत्याधिक तापमान पूरे इलाके में नजर आ रहे हैं. जलवायु परिवर्तन लगातार लाखों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर कर रहा है. उन्हें आजीविका के नए साधन खोजने को मजबूर कर रहा है."

मयूर विहार के यमुना खादर इलाके में रहने वाले देवी और उन जैसे सैकड़ों लोगों के लिए हर बारिश के बाद विस्थापित होना नियति बन गई है. इस बार ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हिमालय में भारी बारिश हुई और कई बांधों का मुंह खोलना पड़ा. नतीजतन, यमुना और अन्य नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया और दिल्ली में यमुना का जल उनके घरों में घुस गया.

अब कहां जाएं!

बात यहीं खत्म नहीं हुई है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी कि 8 से 11 अक्टूबर के बीच उत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों बहुत भारी बारिश हो सकती है. इसमें उत्तराखंड, और उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात और मध्य प्रदेश के कई इलाके भी शामिल हैं. पहाड़ों में बारिश होते ही मैदानों में बहतीं नदियों का पानी हदें तोड़ देगा.

मौसम विभाग कह चुका है कि बारिश सर्दियों में कुछ और समय तक जारी रह सकती है. संभव है कि दिल्ली और उसके आसपास के इलाके 12-13 अक्टूबर तक इसी तरह बारिश झेलते रहें. इसके अलावा आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है.

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दिल्ली में देवी और शिव कुमार यमुना किनारे थोड़ी सी जमीन पर सब्जियां उगाकर अपना घर चला रहे थे. लेकिन अब गाहे बगाहे यमुना घर और खेत में घुस आती है जो जुड़ता है, बहा ले जाती है. उनके सामने बदायूं एक बार फिर हो रहा है. सवाल यह है कि क्या वे यहां से कहीं और जा सकते हैं!

वीके/एए (एपी)

Source: DW

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