Telangana Congress 'करो या मरो' की स्थिति में, वोट शेयर में गिरावट
तेलंगाना में कांग्रेस का जनाधार लगातार घट रहा है। वोट शेयर में गिरावट के कारण कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी गंवा सकती है। कांग्रेस आलाकमान हार और वोट शेयर में गिरावट के कारणों पर मंथन कर रहा है।

Telangana Congress जनाधार खोती दिख रही है। तेलंगाना में कांग्रेस के वोट शेयर में गिरावट के कारण ये बात कही जा रही है। कांग्रेस को 2014 में 24.84 प्रतिशत मत मिले थे जो 2018 के विधानसभा चुनावों में बढ़कर 28.5 प्रतिशत वोट शेयर तक पहुंचे। 2019 के लोकसभा चुनावों में भी थोड़ी बेहतर स्थिति दिखी और कांग्रेस का वोट शेयर 29.5 प्रतिशत हो गया। हालांकि, गत तीन साल में कांग्रेस का जनाधार घटा है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवारों के हारने के कारण वोट शेयर लगातार घट रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेताओं- सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लिखा है कि कांग्रेस पार्टी राज्य में 2023 के विधानसभा चुनावों में 'करो या मरो' की स्थिति का सामना कर रही है। खड़गे ने तेलंगाना में कांग्रेस के प्रदर्शन की समीक्षा भी शुरू कर दी है। आंध्र प्रदेश बंटवारे के बाद तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने वाली कांग्रेस को पता था कि उसे आंध्र प्रदेश में हार का सामना करना पड़ेगा। इसके बावजूद पार्टी 2014 और 2018 के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना के मतदाताओं को वोट देने के लिए राजी नहीं कर सकी।
कांग्रेस के वोट शेयर में गिरावट--
- 2021 के हुजुराबाद उपचुनाव में अब तक का सबसे कम वोट शेयर- 2 प्रतिशत से भी कम मतदाताओं का समर्थन
- 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 34.60 प्रतिशत वोट मिले थे।
- हुजूरनगर में 34 प्रतिशत और नागार्जुन सागर उपचुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 37 प्रतिशत से अधिक
- 2018 में इन दोनों सीटों पर क्रमशः 47 और 42 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे
- मुनुगोडे में कांग्रेस को 2022 के उपचुनाव में 10.58 प्रतिशत मत। चार साल पहले 50 प्रतिशत वोट मिले थे।












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