खांसी की सिरप कैसे बन जाती है जहरीली

दुनिया भर में दवाओं के मानक स्थापित करने में मदद करने वाली संस्था यूएस फार्माकोपिया (USP) में निदेशक चैतन्य कुमार कोडुरी ने बताया कि ये दोनों पदार्थ प्रोपिलीन ग्लाइकोल बनाने का उपोत्पाद या बाईप्रोडक्ट हो सकते हैं.

खांसी की सिरप

मार्किट रिसर्च कंपनी यूरोमॉनिटर के मुताबिक 2022 में बच्चों के लिए खांसी, सर्दी और एलर्जी की आम बिकने वाली दवाओं के वैश्विक बाजार की कीमत करीब 2.5 अरब डॉलर थी. इन दवाओं में बुखार उतारने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पैरासिटामोल के साथ ग्लिसरीन या प्रोपिलीन ग्लाइकोल नाम के केमिकल से बनाये सिरप को मिलाया जाता है.

यह सिरप सुरक्षित, मीठी और घोंटने में आसान होती है. गाम्बिया में वैश्विक स्वास्थ्य अधिकारियों ने आयात की हुई बच्चों की खांसी की सिरप में दो काफी ज्यादा जहरीले पदार्थों को पाया: एथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) और (डीईजी) डाईएथिलीन ग्लाइकोल.

हानिकारक तत्वों की मिलावट

दुनिया भर में दवाओं के मानक स्थापित करने में मदद करने वाली संस्था यूएस फार्माकोपिया (यूएसपी) में निदेशक चैतन्य कुमार कोडुरी ने बताया कि ये दोनों पदार्थ प्रोपिलीन ग्लाइकोल बनाने का उपोत्पाद या बाईप्रोडक्ट हो सकते हैं.

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उन्होंने बताया कि दवाओं में इस्तेमाल के लिए प्रोपिलीन ग्लाइकोल को बनाने वालों को उसे शुद्ध करना पड़ता है ताकि उसमें से जहरीले तत्त्व निकाले जा सकें. अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक दवाओं में ईजी और डीईजी सिर्फ ट्रेस मात्रा में होनी चाहिए. यानी प्रति वॉल्यूम वजन के 0.10 प्रतिशत या सिरप के हर 100 मिलीलीटर में 0.10 ग्राम से ज्यादा नहीं.

सभी पदार्थों के एक जैसे गुण होते हैं. लेकिन जहां प्रोपिलीन ग्लाइकोल जहरीली नहीं होती है, वहीं ईजी और डीईजी बेहद हानिकारक होती हैं. चिकित्सकों का कहना है कि इन्हें खा लेने से गुर्दे काम करना बंद कर सकते हैं और तुरंत इलाज ना मिले तो मौत भी हो सकती है.

खुराक कितनी घातक है यह आंशिक रूप से उसे लेने वाले के वजन पर निर्भर करता है. छोटे होने की वजह से बच्चों को बड़ों के मुकाबले खतरा ज्यादा रहता है. कुमार कोडुरी कहते हैं मानवीय गलतियों की वजह से गड़बड़ भी हो सकती है.

मुनाफे के लिए

लेकिन पूर्व में सप्लायरों और उत्पादकों ने औद्योगिक स्तर के प्रोपिलीन ग्लाइकोल या शुद्ध ईजी और डीईजी को भी मिलाया है क्योंकि वो सस्ते होते हैं. ईजी और डीईजी बेचने वाली दो वेबसाइटों के मुताबिक ये केमिकल प्रोपिलीन ग्लाइकोल के मुकाबले आधे दाम पर मिलते हैं.

1990 के दशकों में पैरासिटामोल सिरपों में मौजूद डीईजी की वजह से हैती में लगभग 90 बच्चों और बांग्लादेश में 200 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी. हाल ही में पनामा, भारत और नाइजीरिया में भी अलग अलग हादसों में बच्चों की मौत हो गई थी.

तब से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बनाये गए वैश्विक दिशानिर्देशों को भी और कड़ा बनाया गया है. उत्पादकों से कहा गया है कि वो अपनी सामग्री और उत्पादों की और जांच करें. लेकिन उत्पादन और इस्तेमाल दोनों ही स्तर पर कानून बनाना और उनका पालन सुनिश्चित करना अलग अलग देशों के ऊपर है.

सीके/एए (रॉयटर्स)

Source: DW

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