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कहीं चीन दलाई लामा संस्था पर अपना कब्जा जमा न ले...?

By Rajeevkumar Singh
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शिमला। तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा की बढ़ती उम्र व गिरते स्वास्थ्य के चलते उनके चाहने वालों में अक्सर यह चिंता रहती है कि दलाई लामा के बाद कौन होगा। हलांकि तिब्बती समुदाय पुनर्वतार में विश्वास रखता है लेकिन हर कोई इस बात को लेकर चिंतिंत रहता है कि कहीं चीन दलाई लामा संस्था पर अपना कब्जा जमा न ले। दरअसल, इससे पहले भी चीन ने पंचेन लामा से करमापा तक को अपने तरीके से पुर्नस्थापित करने की कोशिश की है। यही वजह है कि इन दिनों दलाई लामा के भविष्य को लेकर चिंता का माहौल है।

What will happen organisation of Dalai Lama after him

तिब्बतियों के अध्यात्मिक नेता 14 वें दलाई लामा तेनजिन गयात्सो ने स्पष्ट किया है कि दलाई लामा संस्था का बना रहना या न रहना, लोगों की इच्छा पर निर्भर है। दलाई लामा ने कहा कि इस बारे में न सिर्फ तिब्बतियों, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में हिमाचल और मंगोलिया के लोगों से भी चर्चा करनी चाहिए, जो ऐतिहसिक रूप से इस संस्था से जुड़े रहे हैं। दलाई लामा ने स्पष्ट किया कि दलाई लामा के पुनर्जन्म को मान्यता दी जाए अथवा नहीं, वह तिब्बती, मंगोलियाई और हिमालयी क्षेत्रों के लोगों के निर्णय पर निर्भर था।

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दलाई लामा ने कहा, 'अगर मैं आज मर जाऊं तो कई लोग दलाई लामा संस्था को बरकरार रखना चाहेंगे लेकिन 20 से 30 साल के बाद मुमकिन है उनका नजरिया बदल जाए। उन्होंने कहा, 'पांचवें दलाई लामा के समय से यह संस्था अस्थाई और धार्मिक रूप से कायम है। बीते कुछ दशकों में मैंने खुद को राजनीतिक मामलों से अलग कर रखा है, जो कि तिब्बतियों की चुनी हुई निर्वासित सरकार देखती है। ऐसे में दलाई लामा संस्था विशुद्ध रूप से एक धार्मिक संस्था है और मैं इसी का अनुसरण करता हूं। जब तक जिंदा हूं, दूसरों के काम आऊं।'

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इस सवाल के जवाब में कि वे खुद क्या चाहते हैं, दलाई लामा ने कहा कि समय के साथ लामाओं की कई उच्च संस्थाएं उभरीं और गायब हो गईं। उन्होंने कहा, 'दलाई लामा संस्था कायम रहे या नहीं, यह मेरा विषय नहीं है। मैं जब तक जिंदा हूं, दूसरों के काम आऊं और यही मेरी चिंता और प्रतिबद्धता है। मेरे बाद कौन होगा, यह मेरा विषय नहीं है।'

What will happen organisation of Dalai Lama after him

उन्होंने कहा, 'हम तिब्बती लोग लामा पर व्यक्तिगत रूप से बहुत निर्भर हैं, जो कि गलत है। आपको उनकी दी हुई शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। बुद्ध ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म के कई गुरुओं और तिब्बती गुरुओं ने हमें अपना ज्ञान सौंपा है।' उन्होंने कहा कि वे ही वास्तव में हमारे शिक्षक हैं। उन्होंने नालंदा परंपरा के महान भारतीय धर्म शिक्षक नागार्जुन का खास उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कोई संस्था नहीं बनाई लेकिन उनके शिष्य चीन, तिब्बत और मंगोलिया तक में मिल जाएंगे।'

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What will happen organisation of Dalai Lama after him
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