मां ज्वाला को भक्त ने भेंट किए सोने के चरण, यह है बिन-मूर्ति पूजा वाला दुनिया का पहला मंदिर
मां ज्वाला को भक्त ने चढ़ाए सोने के चरण, यह है बिन मूर्ति पूजा वाला मंदिर
कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा में स्थित श्री ज्वालामुखी मंदिर (शक्तिपीठ) में एक श्रद्धालु ने सोने-चांदी के आभूषण भेंट किए। जिसमें 1 किलो 775 ग्राम सोना और आधा किलो चांदी के आभूषण शामिल हैं। खास बात यह है कि, श्रद्धालु ने माता के दरबार में सोने के चरण चढ़ाए। सोने के चरणों को मंदिर के गर्भगृह में रखा गया है। जिसकी तस्वीरें सामने आई हैं।

काँगड़ा शक्तिपीठ: श्री ज्वालामुखी मंदिर
सोने के चरण मंदिर को भेंट करने वाले श्रद्धालु की पहचान गुप्त रखी गई है। हालांकि, इतना बताया गया है कि वह पंजाब से यहां आया था। आप देख सकते हैं कि विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में कैसे सोने-चांदी के आभूषण दान किए गए हैं। इसकी तस्वीरें अब सोशल साइट्स पर वायरल हो गई हैं। बहुत से लोग सोने के चरण भेंट करने वाले भक्त के बारे में जानना चाहते हैं।

श्रद्धालु ने भेंट किए ये सोने के चरण
सोने के चरण की मार्केट वैल्यू 86 लाख रुपए बताई जा रही है। इन्हें मां ज्वाला के दरबार में मंगलवार रात पंजाब के श्रद्धालु ने चढ़ाया। मंदिर के पदाधिकारी विचित्र सिंह ने कहा कि, यह एक गुप्त भेंट है, जो श्रद्धालु ने मां के चरणों में अर्पित की है। उन्होंने कहा कि, ज्वालामुखी स्थित मां ज्वाला का दरबार, एक विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

यहां मूर्तियों की पूजा नहीं होती
मां ज्वाला के मंदिर में मूर्ति पूजा नहीं होती, बल्कि यहां एक लौ जलती रहती है, जिसे मां ज्वाला का प्रतीक माना जाता है। लोग उसके दर्शन करते हैं। विचित्र सिंह ने बताया कि, इस मंदिर में 7 ज्योतियां अनादिकाल से जलते आ रही हैं। यहां श्रद्धालु इन ज्योतियों की पूजा करते हैं।

नमाज की तरह रोजाना 5 बार आरती
इस मंदिर के बारे में एक ओर अनोखी बात यह भी है कि यहां रोजाना 5 बार आरती होती है। आम तौर पर मंदिरों में सुबह-शाम को ही आरती होती है, लेकिन यहां ऐसा नहीं है। यहां आने वाले कुछ श्रद्धालु सोचते हैं कि उन्हें किसी प्रतिमा की पूजा करनी है, मगर यहां कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है।

दुनिया का एकलौता ऐसा मंदिर है
पुजारी कहते हैं कि, दुनिया में यह पहला ऐसा हिन्दू मंदिर है, जहां प्रतिमा की पूजा नहीं होती। यह विश्व में पहला ऐसा देवालय भी बताया जाता है, जहां साक्षात ज्योति जो कि अनादिकाल से प्रज्वलित है, उसकी पूजा होती है। बताया जाता है कि, चट्टान में ज्योतियां अपने आप जल रही हैं। उन्हें कोई जलाता नहीं है। इसलिए यह अनसुलझी पहेली हैं।

कैसे पहुंचे ज्वालामुखी मंदिर तक?
देश-दुनिया से यहां पहुंचने के लिए वायु मार्ग, सडक़ मार्ग और रेल मार्ग तीनों विकल्प हैं। नजदीकी हवाई अड्डा गगल में है, जो कि ज्वालाजी से 46 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहा से मंदिर तक जाने के लिए कार व बस सुविधा उपलब्ध है।
रेल मार्ग रेल मार्ग से जाने वाले यात्री पठानकोट से चलने वाली स्पेशल ट्रेन की सहायता से मरांदा होते हुए पालमपुर आ सकते हैं। वहीं, पालमपुर से मंदिर तक जाने के लिए बस या कार मिल जाएंगी।

ऐसे भी पहुंचा जा सकता है
यह स्थान पठानकोट, दिल्ली, शिमला आदि प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा है। आप निजी वाहन भी कर सकते हैं। इसके अलावा हिमाचल सरकार की बसें चलती हैं। दिल्ली से भी दिल्ली परिवहन निगम की सीधी बस सुविधा है।












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