ज्वालामुखी में कांग्रेस के बागी ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल

शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ती चुनावी सरगर्मियों के बीच कांगड़ा जिले की ज्वालामुखी चुनाव क्षेत्र भी इन दिनों चर्चा में है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी की धमक से भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों की हालत खस्ता नजर आ रही है। ज्वालामुखी यूं तो भाजपा का गढ़ रहा है,लेकिन पिछले चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी संजय रतन ने इस तिलस्म को तोड़ा व चुनाव जीता। लेकिन मौजूदा चुनावों में हालात बदले हैं। यहां भाजपा से अधिक कांग्रेस कमजोर नजर आ रही है। कांग्रेस के दो नेता बागी हो कर चुनाव मैदान में आ डटे हैं। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता नजर आ रहा है।

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ज्वालामुखी में इस बार से प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। भाजपा के प्रत्याशी पूर्व मंत्री रमेश धवाला, कांग्रेस के मौजूदा विधायक संजय रतन और कांग्रेस से बगावत कर चुके जिला परिषद सदस्य विजेंद्र धीमान व प्रताप सिंह राणा मैदान में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी संजय रतन ने भाजपा के रमेश चंद को हराकर यहां कब्जा जमाया था। हालांकि उनकी जीत का मार्जिन कोई ज्यादा नहीं था, क्योंकि 2012 में उन्हें 24929 वोट मिले थे, तो वहीं भाजपा उम्मीदवार रमेश चंद को 20904 वोट मिले थे।
vijendra

ज्वालामुखी से रमेश चंद चार बार चुनाव लड़ चुके हैं। जिसमें तीन बार वो विजयी रहे, दो बार भाजपा की सीट पर और एक बार निर्दलीय लडक़र उन्होंने चुनाव जीता । इस बार भाजपा ने फिर रमेश धवाला पर भरोसा दिखाया है। पिछले दो चुनावों में उन्होंने लगातार जीत दर्ज की थी और संजय रतन को ही मात दी थी। लेकिन 2012 में संजय रतन कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें जीत मिली। आपको बता दें कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले संजय रतन ने अकेले की दम पर ही चुनाव लड़ा था।

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जिस तरह पिछली बार संजय रतन के पक्ष में यहां महौल था,वह इस बार दिखाई नहीं दे रहा। कुछ कांग्रेसी आजाद चुनाव लड़ रहे धीमान के पक्ष में चले गये हैं तो कुछ संजय रतन से अपनी उपेक्षा को लेकर नाराज चल रहे हैं। इसी वजह से संजय रतन भी अपने आपको असहज महसूस कर रहे हैं। यहां विकास का मुद्दा गौण होता दिखाई दे रहा है। प्रत्याशी का व्यवहार ही चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। लोगों का मानना है कि कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले भाजपा उम्मीदवार रमेश धवाला उनके साथ ज्यादा आत्मीयता के साथ व्यवहार करते हैं। पिछली बार संजय रतन को ज्वालामुखी शहर व खुङ्क्षडयां के पोलिंग बूथों में बढ़त मिली थी। लेकिन इस बार ऐसा महौल दूर तक दिखाई नहीं दे रहा।

इस बार संजय रतन की राह में सबसे बड़े रोड़ा भाजपा उम्मीदवार नहीं, बल्कि कांग्रेस के ही बागी नेता विजेंदर धीमान हैं। बताया जा रहा है कि धीमान के समर्थन में काफी लोग हैं और उनकी चुनाव में जीत दर्ज करने की संभावना भी काफी ज्यादा है। ऐसे में ज्वालामुखी सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो गया है। इस सीट पर आखिरकार कौन जीतेगा, ये देखना दिलचस्प होगा।

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