ज्वालामुखी में कांग्रेस के बागी ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल
शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ती चुनावी सरगर्मियों के बीच कांगड़ा जिले की ज्वालामुखी चुनाव क्षेत्र भी इन दिनों चर्चा में है। यहां निर्दलीय प्रत्याशी की धमक से भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों की हालत खस्ता नजर आ रही है। ज्वालामुखी यूं तो भाजपा का गढ़ रहा है,लेकिन पिछले चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी संजय रतन ने इस तिलस्म को तोड़ा व चुनाव जीता। लेकिन मौजूदा चुनावों में हालात बदले हैं। यहां भाजपा से अधिक कांग्रेस कमजोर नजर आ रही है। कांग्रेस के दो नेता बागी हो कर चुनाव मैदान में आ डटे हैं। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता नजर आ रहा है।


ज्वालामुखी से रमेश चंद चार बार चुनाव लड़ चुके हैं। जिसमें तीन बार वो विजयी रहे, दो बार भाजपा की सीट पर और एक बार निर्दलीय लडक़र उन्होंने चुनाव जीता । इस बार भाजपा ने फिर रमेश धवाला पर भरोसा दिखाया है। पिछले दो चुनावों में उन्होंने लगातार जीत दर्ज की थी और संजय रतन को ही मात दी थी। लेकिन 2012 में संजय रतन कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें जीत मिली। आपको बता दें कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले संजय रतन ने अकेले की दम पर ही चुनाव लड़ा था।

इस बार संजय रतन की राह में सबसे बड़े रोड़ा भाजपा उम्मीदवार नहीं, बल्कि कांग्रेस के ही बागी नेता विजेंदर धीमान हैं। बताया जा रहा है कि धीमान के समर्थन में काफी लोग हैं और उनकी चुनाव में जीत दर्ज करने की संभावना भी काफी ज्यादा है। ऐसे में ज्वालामुखी सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो गया है। इस सीट पर आखिरकार कौन जीतेगा, ये देखना दिलचस्प होगा।












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