Himachal की उस सीट के समीकरण जहां बागी को मनाने के लिए PM मोदी ने किया था कॉल, जानें किसका पलड़ा है भारी?
Himachal pradesh , हिमाचल प्रदेश में 12 नवबंर को वोटिंग होने जा रही है। इससे पहले राजनीतिक दल अपने पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश में जुटे हुए हैं। इस चुनाव में वैसे तो कई सीटों पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा। लेकिन राज्य की एक सीट ही हाल ही में पूरे देश में चर्चा के केंद्र में आ गई है। यह सीट है कांगड़ा जिले में आने वाली फतेहपुर विधानसभा। जहां पर एक बीजेपी के बागी नेता को मनाने के लिए खुद पीएम मोदी ने फोन किया था। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

राकेश पठानिया एंट्री ने बिगाड़े समीकरण
भाजपा के बागी नेता पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रेम कुमार धूमल के करीबी कहे जाने वाले कृपाल परमार ने पार्टी से टिकट काटे जाने के बाद फतेहपुर सीट के अपना पर्चा दाखिल कर दिया था। जिसके बाद इस सीट के समीकरण ही पूरी तरह से बदल गए। दरअसल इस सीट पर बीजेपी से संबंध रखने वाले तीन नेता मैदान में हैं। एक ओर कृपाल परमार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं तो वहीं बीजेपी ने जयराम सरकार में वन मंत्री राकेश पठानिया को चुनाव मैदान में उतारा है। राकेश पठानिया बीजेपी के सीनियर नेता हैं। वह नूरपूर सीट से विधायक हैं और मंत्री भी। बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने से पहले तक राकेश पठानिया और उनके समर्थक नूरपूर सीट प्रचार कर रहे थे।लेकिन जब बीजेपी उम्मीदवारों की लिस्ट आई तो राकेश पठानिया को नूरपूर से फतेहपुर भेज दिया गया है। राकेश पठानिया की एंट्री में फतेहपुर के समीकरणों को पूरी तरह से चेंज कर दिया।
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बीजेपी से संबंध रखने वाले तीन उम्मीदवार मैदान में
वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से पूर्व सांसद राजन सुशांत इस सीट से मैदान में हैं। राजन सुशांत पहले बीजेपी के नेता रहे हैं। सुशांत ने5 बार विधानसभा का चुनाव जीता है। 1998 से 2000 तक वह बीजेपी की धूमल सरकार में मंत्री भी रहे। फिर कांगड़ा से लोकसभा चुनाव जीता। 2012 में जब वह धूमल सरकार और प्रदेश बीजेपी नेतृत्व की खुलकर आलोचना करने लगे, तो बीजेपी ने उनको सस्पेंड कर दिया। इस तरह से इस सीट पर बीजेपी से संबंध रखने वाले तीन उम्मीदवार मैदान हैं।

बीजेपी ने बार बार उम्मीदवार बदले लेकिन हाथ नहीं आई ये सीट
वहीं कांग्रेस ने इस सीट से सुजान सिंह पठानिया के बेटे भवानी सिंह को टिकट दिया है। बीते साल उप चुनावों में उन्हें जीत मिली थी। वैसे इस सीट पर भाजपा का रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है। कांगड़ा जिले के तहत आने वाली इस सीट पर 2012 से कांग्रेस जीतती रही है। 2017 के विधानसभा चुनावों में कृपाल परमार इस सीट पर कांग्रेस नेता सुजान सिंह से 1,284 वोटों से हार गए थे। वहीं इस चुनाव में बीजेपी नेता बलदेव ठाकुर को टिकट ना मिलने पर वे बागी हो गए थे। जिसका असर सीट पर दिखा और बीजेपी फिर से हार गई। जिसके बाद 2021 में हुए उपचुनावों में पार्टी ने बागी बलदेव ठाकुर को पार्टी ज्वाइन करायी और उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह भी इस सीट को पाने में फिर से असफल रहे।

कांग्रेस की दावेदारी और मजबूत हुई
जिसके बाद पार्टी ने इस सीट पर पैराशूट उम्मीदवार के तौर पर राकेश पठानिया को भेजा है। इन सब समीकरणों से साफ ही है कि, इस सीट पर इस बार भी पलड़ा कांग्रेस का ही भारी नजर आ रहा है। जहां बीजेपी के वोट बैंक में एक और कृपाल सिंह परमार सेंध लगाएंगे, तो वहीं दूसरी ओर पूर्व बीजेपी नेता और आप उम्मीदवार राजन सुशांत भी बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी कोशिश करेंगे। जिसका सीधा लाभ कांग्रेस उम्मीदवार को होता दिख रहा है। ऐसे में फतेहपुर के वोटरों के बीच भी ऐसी राय देखने को मिल रही है कि, इस सीट पर कांग्रेस काफी मजबूत नजर आ रही है।

मुझे बार-बार नजर अंदाज किया गया: परमार
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कृपाल परमार ने कहा कि, उम्मीद थी कि मुझे 2021 के उप-चुनाव में टिकट दिया जाएगा, लेकिन पार्टी ने तब मुझे नजरअंदाज किया। अब एकबार फिर ऐसा किया गया है। मैं चुनाव नहीं लड़ने पर विचार कर रहा था लेकिन पार्टी ने राकेश पठानिया को माइग्रेटेड उम्मीदवार के तौर चुनावी समर में उतार दिया। 2017 के विधानसभा चुनाव में 1,284 वोटों के कम अंतर से हारने के बाद भी मुझे राज्य के भाजपा नेतृत्व द्वारा दरकिनार किया गया था।

'मेरी मोदी जी से बात जानबूझकर लेट करायी गई'
कृपाल परमार ने कहा कि, राज्य नेतृत्व मोदी जी को गुमराह कर रहा है। अगर पीएम मोदी मुझे नामाकंन वापस लेने की तारीख से पहले फोन करते तो मैं बिना कुछ सोचे अपना नाम वापस लेता, लेकिन जानबूझकर मोदी जी से मेरी बात नामाकंन वापस लेने की तारीख निकल जाने के बाद करायी गई। तब तक मेरा बैलेट में नाम आ गया था। पार्टी के नेताओं के लग रहा था कि,मोदी के फोन के बाद मैं चुनाव से हट जाउंगा। लेकिन सब के बाद भी मेरे नाम पर 2-4 सौ वोट पड़ जाएंगे। जिसके बाद पार्टी के ये नेता वो लेकर दिखाते फिरेंगे कि, कृपाल निर्दलीय चुनाव लड़े थे तब सिर्फ इतने वोट मिले थे।












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