Shahpur Seat: सरवीण चौधरी पर BJP ने फिर खेला दांव, क्या कांग्रेस-AAP बिगाड़ पाएंगी भाजपा का खेल?
Shahpur Seat: सरवीण चौधरी पर BJP ने फिर खेला दांव, क्या कांग्रेस-AAP बिगाड़ पाएंगी भाजपा का खेल?
Shahpur Assembly Seat: हिमाचल विधानसभा चुनाव (Himachal assembly elections) के लिए 12 नवंबर वोटिंग होनी है। वोटिंग से पहले मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए सत्ताधारी पार्टी बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दल यु्द्धस्तर पर प्रचार-प्रसार में जुट गए है। तो वहीं, आज हम बात कर रहे हैं शाहपुर विधानसभा सीट (Shahpur Assembly Seat) की। शाहपुर सीट बीजेपी का गढ माना जाता है और इस सीट पर पिछले तीन दशक से सरवीण चौधरी का कब्जा है। तो वहीं, सरवीण चौधरी के मुकाबले में कांग्रेस ने केवल सिंह पठानिया और आप ने अभिषेक ठाकुर को चुनावी मैदान में उतारा है।

शाहपुर सीट कांगड़ा जिले की अहम सीट है। इस सीट पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भाजपा प्रत्याशी सरवीन चौधरी के चुनाव प्रचार में उतरे थे। इस दौरान उनके साथ मंच पर सरवीन के धुर विरोधी रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया भी मौजूद रहे। मनकोटिया इस बार कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ चुके हैं और सरवीन चौधरी के मुरीद हो गए हैं। हालांकि, शाहपुर में कांग्रेस नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया व भाजपा की सरवीन चौधरी के बीच ही मुकाबला होता रहा है। जयराम ठाकुर सरकार में सरवीण चौधरी ही अकेली मंत्री रहीं होंगी, जिनके खिलाफ लोग आरोप लगाते रहे। खुद मेजर मनकोटिया ने सरवीन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये और मामला पीएमओ तक गया। लेकिन, अपने विरोधियों से बेपरवाह सरवीण भाजपा टिकट लेने में कामयाब रहीं और उनके धुर विरोधी मेजर मनकोटिया भी उनके साथ आ गये।
सरवीण चौधरी को राजनीति विरासत में नहीं मिली। 56 वर्षीय सरवीन धर्मशाला में पैदा हुई। स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद उनका विवाह ब्रिगेडियर पवन कुमार के साथ हुआ। उनका एक बेटा है। पंजाब यूनिवर्सिटी में भी सरवीण ने शिक्षा हासिल की। 1992 में राजनीति में आईं। 1998 में सरवीण पहली बार विधायक चुनी गईं। उसके बाद 2007 में प्रेम कुमार धूमल सरकार में 1998 से 2003 तक संसदीय सचिव रहीं। 2008 से 2012 तक प्रदेश में सामाजिक अधिकारिता मंत्री रहीं। 2012 में तीसरी बार विधायक चुनी गईं। उसके बाद 2017 में चुनाव जीता और जयराम सरकार में कैबिनेट मंत्री बनीं।
शाहपुर कांगड़ा संसदीय चुनाव क्षेत्र में आने वाली हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 17 है। विधानसभा परिसीमन के दौरान शाहपुर हल्के में कुछ बदलाव आया। उस दौरान कांगड़ा सदर का कुछ हिस्सा शाहपुर में मिला तो धर्मशाला की कुछ पंचायतें शाहपुर में आ गईं। सराहां इलाका धर्मशाला में चला गया। धर्मशाला की नड्डी, सुधेड़ व घरोह पंचायतें शाहपुर में लंज इलाका आ गया। शाहपुर में अनूसूचित जाति एवं जनजाति के करीब 28 फीसदी मतदाता हैं। जबकि ओबीसी बिरादरी के 25 फीसदी हैं, राजपूत मतदाता 20 फीसदी हैं। जबकि ब्राहम्ण 12 फीसदी हैं। धर्मशाला का कुछ हिस्सा यहां मिल जाने से शाहपुर में गद्दी समुदाय के मतदाता भी हैं।
जब भी राजपूत और ब्राह्मण मतदाता आपस में एक हुए है तो मनकोटिया जीते। जब ओबीसी बिरादरी के साथ एससी-एसटी जातियों के मतदाता साथ आए तब सरवीन चौधरी चुनाव जीत गईं। इस बार हालात बदले हैं। मनकोटिया अब भाजपा में आ गए हैं। जिसका लाभ सरवीन को हुआ है। इस नए गठबंधन से कांग्रेस के केवल सिंह पठानिया का राजनीतिक भविष्य फिर दांव पर लग गया हैं। पठानिया को पिछले दो बार पार्टी ने टिकट दिया था। लेकिन दोनों बार बुरी तरह चुनाव हारे और अबकी बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी का मुकाबला इस बार कांग्रेस और आप से है।
शाहपुर से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2017 सरवीन चौधरी भाजपा
2012 सरवीन चौधरी भाजपा
2007 सरवीन चौधरी भाजपा
2003 मेजर विजय सिंह मनकोटिया कांग्रेस
1998 सरवीन चौधरी भाजपा
1993 विजय सिंह मनकोटिया कांग्रेस
1990 विजय सिंह मनकोटिया जनता दल
1985 विजय सिंह कांग्रेस
1982 विजय सिंह निर्दलीय
1977 राम रत्तन जनता पार्टी
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