9 गोलियां लगने के बाद भी मौत को हराने वाले चेतन चीता ने कोरोना को दी मात, लेकिन अगले 48 घंटे अहम
झज्जर, जून 03: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अधिकारी और कीर्ति चक्र विजेता चेतन चीता इन दिनों एम्स में भर्ती हैं। वे कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। हालांकि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनका इलाज हरियाणा के झज्जर एम्स द्वारा संचालित नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट में चल रहा है। बताया जा रहा है कि, चेतन चीता के लिए अगले 48 काफी अहम होने वाले हैं। अब उनका परिवार उन्हें एम्स झज्जर से एम्स दिल्ली या किसी अच्छे प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने पर विचार कर रहा है।

उनकी कोरोना रिपोर्ट्स निगेटिव आई
एम्स के डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और सीआरपीएफ के अधिकारियों के मुताबिक उनका हर संभव बेहतर इलाज हो रहा है। मामले सामने आने के बाद दिल्ली एम्स भी उनकी निगरानी में शामिल हो गया है। दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने व्यक्तिगत रूप से मामले की जांच की। डॉक्टरों ने उनको शिफ्ट न करने की सलाह दी है। उनका ऑक्सीजन स्तर 95 है लेकिन फ्लक्चुएट कर रहा है। हालांकि उनकी कोरोना रिपोर्ट्स निगेटिव आई है।

अगले 48 घंटे नाजुक हैं
नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के कोविड सर्विस की चेयरपर्सन डॉ. सुषमा भटनागर ने बताया, 'अगले 48 घंटे नाजुक हैं। वह फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं। एंटी वायरल थेरपी के साथ हम सेकंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स दे रहे हैं। उन्हें ब्लड प्रेशर मेनटेन रखने के लिए भी दवा की जरूरत है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी चेतन चीता के हालचाल को लेकर एम्स, झज्जर के डॉक्टरों से बातचीत की है।

उनके स्वस्थ होने हर ओर हो रही हैं प्रार्थनाएं
9 मई को कोविड पॉजिटिव होने के बाद ऑक्सिजन लेवल कम होने पर उन्हें एम्स लाया गया। शुरुआत में उन्हें ऑक्सिजन सपोर्ट पर आईसीयू में रखा गया था। डॉक्टरों का कहना है कि एंटी वायरल थेरपी से उनकी हालत में सुधार हो रहा था लेकिन रविवार को अचानक फिर सेहत बिगड़ गई। चेतन चीता के कोरोना संक्रमित होने की खबर जैसे ही कोटा में उनके परिजनों को लगी तो उनकी चिंता बढ़ गई। मां सुभद्रा चीता अपने बेटे की सलामती के लिए दिन रात प्रार्थना कर रही हैं। कमांडेंट चेतन के पिता रामगोपाल चीता का कहना है कि उनका बहादुर बेटा एक बार फिर जंग जीत कर जल्द लौटेगा।

मौत को मात देकर 2018 में ड्यूटी पर लौटे थे चेतन
चीता फरवरी 2017 में कश्मीर घाटी में सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन के कमांडिंग अफसर के रूप में तैनात थे। एक आतंकी हमले में उनके सिर, दाईं आंख, पेट, दोनों बांहें, बाएं हाथ और कमर के निचले हिस्से में कई गोलियां लगी थीं। एम्स ट्रामा सेंटर में कई सर्जरी कर उनकी जान बचाई गई थी। वह अप्रैल 2017 में डिस्चार्ज हुए थे और 2018 में वापस ड्यूटी पर लौट आए थे। उन्हें शांतिकाल में बहादुरी के दूसरे सबसे बड़े सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था।












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