Haryana: वाल्मीकि जयंती के दिन नायब सैनी सरकार का शपथग्रहण, क्या संदेश देना चाहती है BJP?
Haryana New Government: बीजेपी अपने हर एक्शन से कुछ न कुछ राजनीतिक संदेश देने के लिए जानी जाती है। हरियाणा में वह लगातार तीसरी बार और अपनी अबतक की सबसे बड़ी बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। इसलिए वह शपथग्रहण से ही सियासी संदेश देने की कोशिश में है। बीजेपी को इस बार उसकी अप्रत्याशित जीत में दलित-ओबीसी मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिला है और नायब सिंह सैनी की सरकार इनपर आगे भी फोकस रखेगी, यह बात शपथग्रहण के लिए 17 अक्टूबर की तारीख चुनने से ही साफ हो चुकी है।
17 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती है। नायब सिंह सैनी की पहले मंगलवार यानी 15 अक्टूबर को शपथ लेने की चर्चा थी। लेकिन, बाद में इसकी तारीख बढ़ाकर 17 अक्टूबर, 2024 कर दी गई। हरियाणा सरकार पहले ही महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी घोषित कर चुकी है।

वाल्मीकि जयंती पर शपथग्रहण से दलित समुदाय को संदेश देने की कोशिश
मतलब साफ है कि जिस दलित समुदाय ने लोकसभा चुनावों में बीजेपी से मुंह मोड़ लिया था, पार्टी उनका समर्थन फिर से मिलने से गदगद है। वैसे महर्षि वाल्मीकि का सम्मान भाजपा के राजनीतिक एजेंडे में नया नहीं है। लेकिन, इसके लिए शपथग्रहण की तारीख उनकी जयंती पर ही सुनिश्चित करना खास है।
बीजेपी को अंदाजा है कि इस बार दो कार्यकालों की एंटी-इंकंबेंसी को मात देकर भी वह पहले से ज्यादा बहुमत से अगर सरकार बना रही है तो यह ओबीसी और दलित मतदाताओं के समर्थन की बदौलत ही संभव हुआ है।
कल्याणकारी योजनाओं का भी मिला भाजपा को लाभ
हरियाणा की मौजूदा बीजेपी सरकार पहले से ही दलित और ओबीसी समुदायों को खासतौर पर फोकस कर रही थी। इन चुनावों में उसे इसका भरपूर लाभ भी मिला है। राज्य सरकार 500 रुपए में एलपीजी देने की पहल शुरू की तो मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना की तर्ज पर लाडो लक्ष्मी योजना के माध्यम से मुख्य तौर पर दलित-ओबीसी वर्ग की महिलाओं को जोड़ने की कोशिश भी की।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, 'बीजेपी एक ऐसी पार्टी है, जिसने हमेशा ही दबे-कुचलों, गरीबों, पिछड़े वर्गों और दलितों का पूर्ण सम्मान दिया है। दूसरी राजनीतिक पार्टियों की तरह नहीं, जिन्होंने सिर्फ इन वर्गों तक पहुंचने का दिखावा किया है, 2014 से सत्ता में आने के बाद से ही बीजेपी ने कई तरह के पहल किए हैं।'
हरियाणा की 17 एससी सीटों में से बीजेपी ने जीती 8 सीटें
हरियाणा चुनाव पर एक सर्वे के मुताबिक राज्य में इस बार विधानसभा चुनावों में दलित मतदाताओं ने दिल खोलकर भाजपा के पक्ष में वोट डाले हैं। लोकसभा चुनाव में दलित और ओबीसी वोटर बीजेपी से काफी हद तक छिटक गए थे, जिसकी वजह से राज्य की 10 में से 5 सीटों का उसे नुकसान उठाना पड़ा था।
हरियाणा में करीब 21% दलित आबादी है। राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 17 अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। बीजेपी ने इस बार इनमें से 8 सीटें जीत ली हैं। वहीं राज्य में ओबीसी की जनसंख्या 30% से भी ज्यादा है। इस वर्ग का भी पार्टी को इस चुनाव में बड़ा समर्थन मिला है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी ओबीसी समुदाय से हैं।
महर्षि वाल्मीकि पर हमेशा से फोकस करती आ रही है बीजेपी
जहां तक महर्षि वाल्मीकि जैसे संतों की बात है तो ऐसे दिव्य महापुरुष हमेशा से बीजेपी के सियासी एजेंडे में फिट बैठते रहे हैं और पार्टी उन्हें अपनी रणनीति का हिस्सा बनाने में जरा भी संकोच नहीं करती। इस साल अयोध्या में पवित्र राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही केंद्र सरकार ने जनवरी में अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के ही नाम पर कर दिया था।
जहां तक हरियाणा की बात है तो 2014 में पहली बार सरकार बनाने के एक साल बाद ही अक्टूबर, 2015 में तत्कालीन सीएम मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की थी कि राज्य में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एक यूनिवर्सिटी होगी। 2016 के बाद से वाल्मीकि जयंती प्रदेश-स्तरीय समारोह बन गया। जून, 2021 में कैथल यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर महर्षि वाल्मीकि संस्कृत यूनिवर्सिटी, कैथल कर दिया गया।
बीजेपी का संदेश, दलित-ओबीसी उसके एजेंडे में रहेंगे विशेष!
जिस तरह से भाजपा अपनी सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत ही वाल्मीकि जयंती से कर रही है, उससे उसका संदेश साफ है कि वह इन वर्गों से जुड़े मुद्दों पर खास फोकस करती रहेगी, क्योंकि इनके भ्रमित हो जाने का खामियाजा उसे 2024 के लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ चुका है और वह अपने दम पर पूर्ण बहुमत की लगातार तीसरी बार सरकार बनाने से चूक चुकी है।












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