Haryana: कांग्रेस और BJP में कैसे हुआ जातिगत वोटों का बंटवारा? दलितों, मुसलमानों ने किसे दिए कितने वोट?-सर्वे
Haryana Chunav Result: हरियाणा के मतदाताओं ने इस बार कुछ इस तरह से मतदान किया है कि सातवें आसमान से कांग्रेस की उम्मीदें सीधे सियासी खजूर पर आकर गिरी हैं। कांग्रेस के अरमानों को एग्जिट पोल ने भी खूब हवा दी थी। लेकिन, जब पार्टी के चुनावी रणनीतिकारों को मतदाताओं के मूड का इल्म होगा तो उनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक सकती है। चुनाव के बाद हुए सर्वे में जो तस्वीर उभरी है, वह सियासी पंडितों को भी चकरा सकता है।
अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने सीएसडीएस-लोकनीति का एक सर्वे प्रकाशित किया है, उससे लगता है कि हरियाणा में जो चुनावी अंडरकरंट चल रहा था, उसे भांपने में कांग्रेस पार्टी तो नाकाम रही ही है, खुद को चुनावी राजनीति के पारखी मानने वाले घुरंधर भी पूरी तरह से नाकाम हो गए। इस सर्वे से जाहिर होता है कि हरियाणा में वोटरों के मतदान करने की संभावनाओं को लेकर जो धारणा तैयार की गई थी, वह पूरी तरह से बेबुनियाद थी।

हरियाणा में हवा हो गए राहुल गांधी के चुनावी दावे और वादे-सर्वे
अन्य राज्यों और लोकसभा चुनावों की तरह ही लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हरियाणा चुनाव में भी जातिगत जनगणना और जातिवादी राजनीति को लेकर खूब चुनावी रोटी सेंकने की कोशिश की थी। लेकिन, चुनाव बाद के सर्वे से लगता है कि हरियाणा के मतदाताओं ने उनके वादों और दावे पर जमकर सियासी मजे लिए हैं।
हरियाणा में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पूरी तरह से इस लाइन पर सेट थी कि जाट उनके साथ हैं ही, जाति जनगणना और आरक्षण की बातों का दांव फेंककर ओबीसी और दलित जातियों को भी अपने लिए वोटिंग करने को मजबूर कर देंगे। लेकिन, उनकी रणनीतिक सोच यहीं पर फेल हो गई।
हरियाणा के 47% जाटों ने कांग्रेस के खिलाफ वोट डाला- सर्वे
हरियाणा में जाट पार्टी के साथ है, यह मानकर कांग्रेस ने इस चुनाव में 27 जाट उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन, सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे के अनुसार सिर्फ 53% जाट वोट ही कांग्रेस के खाते में गया है और 47% जाट वोटों का बंटवारा हो गया, जिनमें से 28% बीजेपी के खाते में गए हैं। यही वजह है कि जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई वाली कांग्रेस के सिर्फ 13 जाट एमएलए ही जीते हैं।
कुल मिलाकर इस सर्वे का यह नतीजा है कि कांग्रेस जिसे अपना कोर वोट वोटर मानकर चल रही थी, उसमें उसका प्रभाव जरूर रहा है, लेकिन बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर उससे कहीं ज्यादा अच्छा किया है।
बीजेपी को मिले 35% जाटव और कांग्रेस को 33% गैर-जाटव दलित वोट-सर्वे
हरियाणा में दलितों की आबादी 21% है। इनमें से आधी आबादी अकेले जाटवों की है और कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा इसी बिरादरी से आती हैं। लेकिन, कांग्रेस में सैलजा जैसे चेहरे रहने के बावजूद सिर्फ 50% ही जाटव वोट ही मिले हैं। वहीं 35% जाटव मतदाताओं ने बीजेपी को भी वोट दिए हैं।
वहीं गैर-जाटव दलित जातियों ने तो दिल-खोलकर भाजपा को वोट दिया है और कांग्रेस उससे काफी पिछड़ गई है। हरियाणा में 45% गैर-जाटव मतदाताओं के वोट बीजेपी को मिले हैं, वहीं कांग्रेस के खाते में सिर्फ 33% गए हैं।
ओबीसी जातियों में 62% यादव वोट भाजपा के खाते में-सर्वे
जहां तक ओबीसी जातियों की बात है तो 62% यादवों ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया है, वहीं कांग्रेस के खाते में मात्र 25% यादव वोट गए हैं। अलबत्ता इस सर्वे पर यकीन करें तो गुर्जर वोट जुटाने में कांग्रेस आगे रही है और उसे 44% वोट हासिल हुए हैं, जबकि बीजेपी सिर्फ 37% वोट जुटा सकी है।
ऊंची जातियों के वोट में भाजपा का रहा दबदबा- सर्वे
जहां तक ऊंची जातियों और पंजाबी खत्री बिरादरी की बात है तो कांग्रेस का भाजपा के मुकाबले लगभग सफाया ही हो चुका है। मसलन, 51% ब्राह्मण वोट बीजेपी के पक्ष में पड़े हैं तो 31% कांग्रेस को गए हैं। वहीं अन्य ऊंची जातियों में भाजपा को 59% मत प्राप्त हुए हैं तो कांग्रेस सिर्फ 22% वोट ही जुटा सकी है। पंजाबी खत्री की बात करें तो बीजेपी को एकतरफा 68% वोट हासिल हुए हैं, लेकिन कांग्रेस 18% वोट पर ही सिमट गई है।
मुस्लिम मतदाताओं की चहेती बनी कांग्रेस, बीजेपी को सिर्फ 7% मुस्लिम वोट-सर्वे
अलबत्ता कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से हरियाणा में भी मुसलमान वोटरों की चहेती बनकर उभरी है। राज्य के 59% मुसलमानों ने कांग्रेस को वोट दिया है, जबकि भाजपा सिर्फ 7% मुस्लिम वोट जुटा पाने में सफल रही है। 3% मुसलमान वोट आईएनएलडी-बीएसपी गठबंधन के खाते में गए हैं और 31% मुस्लिम वोट अन्यों को मिले हैं।
कांग्रेस को मिले 47% सिख वोट, बीजेपी को 21%-सर्वे
वहीं हरियाणा में 47% सिख वोट कांग्रेस के खाते में गए हैं, जबकि भाजपा को 21% सिख मतदाताओं ने पसंद किया है। वहीं बीएसपी-आईएनएलडी गठबंधन को 17% और अन्य को 15% सिख मतदाताओं के वोट मिले हैं।
हरियाणा विधानसभा के लिए 5 अक्टूबर को मतदान हुआ था और 8 अक्टूबर को नतीजे आए थे। 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में बीजेपी पिछली बार से 8 ज्यादा यानी 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी है तो कांग्रेस मात्र 37 सीटें जीतकर तीसरी बार भी कुर्सी से दूर ही रह गई है। वहीं 2 सीटें आईएनएलडी और 3 निर्दलियों के खातों में गई हैं।












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