हरियाणा ने केंद्र सरकार से मांगे बिना ब्याज के 5 हजार करोड़, जानिए कहां खर्च होगी इतनी रकम?
चंडीगढ़। भाजपा शासित प्रदेश हरियाणा ने केंद्र सरकार से पांच हजार करोड़ रुपये मांगे हैं। इतनी बड़ी रकम की मांग मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राजधानी दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई प्री-बजट बैठक में की। उन्होंने बैठक के बाद पत्रकारों से भी बात की। जहां उन्होंने कहा कि, हमने राखीगढ़ी के लिए अलग बजट और एफपीओ की कर्ज सीमा बढ़ाने की भी मांग की है।

जनसंपर्क एवं सूचना विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि, राज्यों को 50 वर्ष के लिए बिना ब्याज के दिए जाने वाले पूंजीगत व्यय की राशि बढ़ाने के साथ केंद्र सरकार से 5000 करोड़ रुपये मांगे हैं। खट्टर सरकार ने मांग की है कि, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नाबार्ड 2.75 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देता है, उसी तरह एनसीआर प्लॉनिंग बोर्ड से भी ऋण मुहैया करवाया जाए। खट्टर ने कहा कि, महामारी के बावजूद उनकी सरकार ने अपना वित्तीय प्रबंधन अच्छे से बनाए रखा। आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने के लिए अलग से रणनीति बनाई।

मुख्यमंत्री का कहना है कि, उन्हें 2.75 फीसदी ब्याज दर के साथ कर्ज मिलने पर एनसीआर क्षेत्र में तेज गति से विकास हो सकेगा। उन्होंने मांग की कि, जीएसटी के लिए हाईब्रिड मॉडल बनाए जाए। जिसमें खपत के साथ-साथ उत्पादन शेयर भी सम्मलित किया जाए। बैठक में ये जाहिर किया गया कि, इससे ज्यादा उत्पादन करने वाले राज्यों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना पर भी पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि, इस योजना में बड़ी संख्या में लोगों को मुद्रा स्कीम के माध्यम से ऋण मिल रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी सरकार चाहती है कि, उपरोक्त योजना से ब्याज माफी योजना भी बनाई जाए। उन्होंने तर्क दिया कि, एफपीओ के लिए कर्ज सीमा फिलहाल 2 करोड़ रुपये है, इसे बढ़ाने से बड़ी खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं लगाई जा सकेंगी। राज्य सरकार का दावा है कि, हरियाणा में एमएसएमई का विस्तार हो रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने कहा कि, निर्यात के लिए सब्सिडी का निर्धारण करें, इससे वे अपने उत्पाद विदेशों में भेज सकेंगे। मुख्यमंत्री की मांग है कि, साथ में कंटेनर भी उपलब्ध करवाए जाएं। जिससे पोर्ट तक आसानी से सामान पहुंचा सकेंगे।












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