हरियाणा में भाजपा ने दलितों और जाटों के गढ़ भेद कर लगाई हैट्रिक, जानिए पार्टी की पूरी रणनीति
Haryana Assembly Election Results 2024: हरियाणा में भाजपा ने एक बार फिर सत्ता में वापसी करते हुए लगातार तीसरी बार चुनावी जीत दर्ज की है। पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर और विपक्षी दलों के हमलों को पार करते हुए 48 सीटों पर कब्जा किया। यह संख्या कांग्रेस से 11 सीटें अधिक है। जिसने 37 सीटें जीती। जबकि जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी को कड़ी हार का सामना करना पड़ा। वहीं इंडियन नेशनल लोक दल सिर्फ दो सीटों तक सीमित रही।
चुनाव परिणामों ने उन एग्जिट पोलों को झूठा साबित कर दिया है। जिन्होंने कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी की थी। हरियाणा में भाजपा की इस जीत ने यह दिखाया कि राज्य में उसका प्रभाव मजबूत है। विशेष रूप से दलित और जाट बहुल क्षेत्रों में पार्टी ने महत्वपूर्ण लाभ अर्जित किया। जो परंपरागत रूप से कांग्रेस के गढ़ माने जाते थे।

राज्य की 17 अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों में से भाजपा ने आठ पर जीत हासिल की। इनमें नीलोखेड़ी, पटौदी, खरखौदा, होडल, बावल, नरवाना, इसराना और बवानी खेड़ा शामिल हैं। कांग्रेस ने शेष नौ सीटें जीती। लेकिन भाजपा का दलित वोट बैंक में प्रवेश कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया। होडल सीट पर कांग्रेस के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष उदयभान की भाजपा के हरिंदर सिंह के हाथों हार ने इस चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया।
भाजपा ने 2019 में केवल पांच अनुसूचित जाति की सीटें जीती थी। लेकिन 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर आठ हो गया। इस सुधार का श्रेय पार्टी की रणनीतिक नीतियों को दिया जा रहा है। जिसमें अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण पर हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग की रिपोर्ट को लागू करना एक प्रमुख कदम था।
सोनीपत, रोहतक और जींद जिलों के जाट बहुल इलाकों में भाजपा ने पांच सीटें जीती। जिसमें गोहाना, जींद, सफीदों, सोनीपत और उचाना कलां शामिल हैं। वहीं कांग्रेस ने बरोदा, बेरी, गढ़ी संपला-किलोई, जुलाना, मेहम और रोहतक में जीत दर्ज की। बहादुरगढ़ और गनौर निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी जीत दर्ज कराई।
भाजपा ने गैर-जाट और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए विशेष प्रयास किए। पार्टी ने पिछड़े वर्गों के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपए कर दिया और सत्ता विरोधी लहर को रोकने के लिए ओबीसी नेता नयाब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाया।
दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल बेल्ट में भी भाजपा ने प्रभावी प्रदर्शन किया। जहां उसने अटेली, बावल, गुड़गांव, कोसली, महेंद्रगढ़, नारनौल, पटौदी, रेवरी और सोहना जैसी नौ सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस केवल नंगल चौधरी में एक सीट जीत पाई।
जीटी रोड बेल्ट में भी भाजपा का दबदबा बना रहा। पार्टी ने घरौंडा, इंद्री, इसराना, करनाल, लाडवा, नीलोखेड़ी, पानीपत शहर और ग्रामीण, राई और समालखा जैसी सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस ने केवल शाहबाद और थानेसर सीटों पर जीत दर्ज की। मुख्यमंत्री सैनी ने लाडवा सीट पर अपनी जीत दर्ज की।
भाजपा ने बेरोजगारी और किसानों की चिंताओं का जवाब देते हुए अग्निपथ योजना और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों पर जोर दिया। वहीं कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार को भी भाजपा ने अपना प्रमुख मुद्दा बनाया।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा की लगातार तीसरी जीत ने राज्य की राजनीतिक माहौल को एक बार फिर बदल दिया है। भाजपा की इस जीत में विकास, ओबीसी और दलितों को साधने की रणनीति और कांग्रेस की विफलताओं का अहम योगदान रहा। अब भाजपा राज्य में विकास के अगले अध्याय की तैयारी कर रही है।












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